म्यूचुअल फंड के दिग्गज CAMS (Computer Age Management Services) ने अपनी निर्भरता कम करने के लिए नई रणनीति बनाई है। कंपनी का लक्ष्य अगले तीन साल में नॉन-म्यूचुअल फंड सेवाओं से अपनी कुल कमाई का **20%** हिस्सा हासिल करना है।
कोर बिजनेस से आगे की राह
लंबे समय से CAMS की कमाई का बड़ा हिस्सा म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग से आता रहा है। हालांकि यह सेगमेंट कंपनी के लिए मजबूती का आधार है, लेकिन यह पूरी तरह से बाजार के उतार-चढ़ाव और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ग्रोथ पर निर्भर है। इस निर्भरता को कम करने और एक संतुलित रेवेन्यू मिक्स बनाने के लिए कंपनी अब नए रास्ते तलाश रही है। फिलहाल, नॉन-म्यूचुअल फंड सेगमेंट का कुल कमाई में योगदान करीब 15% से 16% के बीच है।
पेमेंट्स और टेक पर फोकस
अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी अपनी पेमेंट सर्विसेज यूनिट को तेजी से स्केल कर रही है। उम्मीद है कि इस फाइनेंशियल ईयर में यह यूनिट ₹100 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट करेगी। यह यूनिट कंपनी के मौजूदा SIP मैंडेट प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से ही निकली है। खास बात यह है कि CAMS ई-कॉमर्स या गेमिंग जैसे अस्थिर सेक्टरों से दूर रहकर केवल फाइनेंशियल सर्विसेज पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
इसके अलावा, कंपनी ने हाल ही में ConsenPro नाम का एक नया टेक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो कंपनियों को DPDP (Digital Personal Data Protection) अनुपालन में मदद करेगा। अभी इनका योगदान रेवेन्यू में सीमित है, लेकिन CAMS इसे एक बड़े लॉन्ग-टर्म दांव के रूप में देख रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह बिजनेस मॉडल में एक बड़ा बदलाव है। यदि पेमेंट्स और टेक प्लेटफॉर्म्स को पैमाना (Scale) मिलता है, तो इससे कंपनी के मार्जिन में सुधार हो सकता है। हालांकि, बाजार में KFin Technologies जैसे प्रतिस्पर्धियों से कड़ी टक्कर भी मिलेगी। निवेशकों के लिए अगली कुछ तिमाहियों के रिजल्ट्स पर नजर रखना जरूरी होगा, ताकि यह देखा जा सके कि मैनेजमेंट बिना कर्ज बढ़ाए या कोर बिजनेस को प्रभावित किए इस विस्तार को कैसे अंजाम देता है।
