पूर्व RBI गवर्नर C. Rangarajan ने Small Finance Banks (SFBs) के लिए एक नई इंसेंटिव पॉलिसी की मांग की है। उनका मानना है कि बैंकों को यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस देने के लिए केवल उनका ऑपरेशनल परफॉरमेंस ही मुख्य पैमाना होना चाहिए।
लाइसेंस का नया रास्ता
पूर्व भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर सी. रंगराजन ने देश में स्मॉल फाइनेंस बैंक सेक्टर की ग्रोथ के लिए एक बड़े नीतिगत बदलाव की वकालत की है। चेन्नई में Equitas Small Finance Bank के हेडक्वार्टर में बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में अभी केवल 11 छोटे फाइनेंस बैंक हैं, जो इस सेक्टर के विस्तार के लिए नाकाफी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी छोटे बैंक को यूनिवर्सल बैंक का दर्जा देने के लिए उसकी रेगुलेटरी और ऑपरेशनल हिस्ट्री को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
Equitas का शानदार टर्नअराउंड
Equitas Small Finance Bank का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे बैंक ने मुश्किल दौर से बाहर आकर शानदार प्रदर्शन किया है। बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹184 करोड़ का मुनाफा कमाया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में बैंक को ₹224 करोड़ का बड़ा घाटा हुआ था। साथ ही, बैंक के ग्रॉस एडवांसेज में 27% की बढ़ोतरी हुई है, जो ₹47,641 करोड़ के स्तर पर पहुंच गए हैं, और डिपॉजिट्स में 10% का उछाल आकर यह ₹48,976 करोड़ हो गए हैं।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि ग्रोथ के आंकड़े मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि बैंक मार्जिन का दबाव झेल रहे हैं। फंडिंग की बढ़ती लागत और रिटेल डिपॉजिट के लिए मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, बैंकों के लिए मुनाफे को बरकरार रखना चुनौती है।
RRBs के विलय पर चिंता
रंगराजन ने रीजनल रूरल बैंकों (RRBs) के विलय पर भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि इन बैंकों को राज्य स्तर पर मर्ज करने से इनका मुख्य उद्देश्य—क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा करना—कमजोर पड़ सकता है, जिससे ग्रामीण बैंकिंग की पहुंच प्रभावित होने का खतरा है।
