Bank of America (BofA) Securities का अनुमान है कि RBI 2027 तक रेपो रेट में कुल **100 बेसिस पॉइंट** की बढ़ोतरी कर सकता है। बढ़ती महंगाई और क्रेडिट डिमांड के कारण अक्टूबर से ही दरों में इजाफे की शुरुआत हो सकती है।
रेपो रेट में बढ़त के पीछे क्या है वजह?
Bank of America (BofA) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के साथ-साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ रहा है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17.8% के स्तर पर है, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो चिंता का विषय है। ब्रोकरेज का मानना है कि RBI दिसंबर तक अपनी पॉलिसी का रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर सकता है।
आम आदमी और कर्जदारों पर असर
रेपो रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि बैंक लोन महंगे हो जाएंगे। अगर आप होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं, तो आपकी EMI का बोझ बढ़ सकता है। इसके अलावा, कॉरपोरेट सेक्टर के लिए भी फाइनेंस कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिससे उन कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है जिन पर भारी कर्ज है। BofA का अनुमान है कि रेपो रेट 6.25% तक जा सकता है।
क्या है भविष्य का रास्ता?
यह फैसला पूरी तरह से फिक्स नहीं है। अगर भारत की GDP ग्रोथ 6% के करीब सुस्त पड़ती है, तो RBI अपने इस टाइटनिंग साइकिल को रोक भी सकता है। वहीं, अगर विकास दर 7% पर बरकरार रहती है, तो ब्याज दरें अनुमान से ज्यादा भी बढ़ सकती हैं। फिलहाल बाजार की नजरें 7 अक्टूबर को होने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं, जहां से महंगाई और ग्रोथ को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख साफ होगा।
