Bank of Baroda ने NSE के आने वाले IPO के जरिए अपनी **35%** हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है। इसके साथ ही बैंक ने साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए डिजिटल लिटरेसी पर जोर देने की बात कही है, क्योंकि बैंक फिलहाल नेट इंटरेस्ट मार्जिन के दबाव से जूझ रहा है।
नॉन-कोर एसेट्स से वैल्यू अनलॉक करने की तैयारी
Bank of Baroda ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में साफ कर दिया है कि वह National Stock Exchange (NSE) में अपनी 35% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है। बैंक ने इसके लिए 76.9 लाख से अधिक शेयर एक एस्क्रो अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए हैं। यह बिक्री NSE के बहुप्रतीक्षित IPO के जरिए 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) रूट से की जाएगी। इस कदम से बैंक को अपनी नॉन-कोर इन्वेस्टमेंट से बड़ी रकम जुटाने में मदद मिलेगी।
साइबर सुरक्षा और CEO की नसीहत
Global Fintech Fest के दौरान, Bank of Baroda के MD और CEO देबदत्त चंद ने एक अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केवल तकनीक से साइबर क्राइम को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि पब्लिक फाइनेंशियल और डिजिटल लिटरेसी को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, क्योंकि आज के समय में डिजिटल अरेस्ट स्कैम और सोशल इंजीनियरिंग जैसे मामले आम हो गए हैं।
तकनीक का नया दांव और बैंकिंग चुनौतियां
बैंक अपने ऑपरेशनल प्रॉफिट का एक हिस्सा टेक्नोलॉजी अपग्रेड और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहा है। इसके साथ ही, बैंक अब MSME सेक्टर को कर्ज देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि ग्राहकों की क्रेडिट वर्थनेस को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
हालांकि, इन सबके बावजूद बैंकिंग सेक्टर के सामने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) का दबाव बना हुआ है। लिक्विडिटी की कमी और फंडिंग कॉस्ट कम करने के सीमित विकल्पों के चलते निवेशकों की नजर बैंक के आने वाले तिमाही नतीजों और डिजिटल स्ट्रेटेजी के नतीजों पर टिकी रहेगी।
