ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म Blackstone ने भारत में अपना निवेश अगले **5** सालों में **$50 बिलियन** से बढ़ाकर **$100 बिलियन** करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी डेटा सेंटर्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर पर फोकस कर रही है, हालांकि मैनेजमेंट ने रुपये की गिरती कीमतों को विदेशी निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है।
भारत की ग्रोथ पर भरोसा
Blackstone के प्रेसिडेंट और COO, Jonathan Gray ने इस महत्वाकांक्षी विस्तार की पुष्टि की है। कंपनी का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में जबरदस्त मोमेंटम है, जो इसे एक पसंदीदा निवेश गंतव्य बनाता है। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये में आने वाली गिरावट विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न कम करने का एक बड़ा कारण बनी हुई है।
नई रणनीति: रियल एस्टेट से हटकर इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
Blackstone अब केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी का नया फोकस हेल्थकेयर, फाइनेंशियल सर्विसेज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को देखते हुए डेटा सेंटर्स और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा रही है। इन प्रोजेक्ट्स की खासियत यह है कि इनमें 15 से 20 साल के लंबे कॉन्ट्रैक्ट्स होते हैं, जो निवेश को एक तरह की सुरक्षा (Security) प्रदान करते हैं।
नियमों में बदलाव की मांग
Blackstone ने भारत में सुधारों, जैसे GST और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की सराहना की है, लेकिन साथ ही मार्केट रेगुलेशन पर भी सवाल उठाए हैं। कंपनी ने विशेष रूप से भारतीय स्टॉक मार्केट में 'डिलिस्टिंग नियमों' (Delisting norms) की ओर इशारा किया है। फिलहाल, किसी कंपनी को प्राइवेट करने के लिए 90% हिस्सेदारी की अनिवार्यता है, जो दुनिया में सबसे सख्त नियमों में से एक है। कंपनी का मानना है कि अगर इन नियमों में ढील दी जाए, तो बाजार में कैपिटल फ्लो और बेहतर हो सकता है।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये रेगुलेटरी बदलाव होते हैं और डेटा सेंटर व हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश की योजनाएं किस गति से आगे बढ़ती हैं।
