ब्लैकसॉइल एसेट मैनेजमेंट ने अपने दूसरे क्रेडिट फंड से ₹750 करोड़ का पूरा निवेश 40 कंपनियों में कर दिया है। यह शुरुआती ₹500 करोड़ के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है, जो कैपिटल रीसाइक्लिंग से संभव हुआ। यह दिखाता है कि ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स में प्राइवेट क्रेडिट की मांग बढ़ रही है, जबकि बैंकों से लोन मिलना अभी भी मुश्किल है।
BlackSoil India Credit Fund II ने किया पूरा निवेश
ब्लैकसॉइल एसेट मैनेजमेंट ने अपने दूसरे क्रेडिट फंड, 'ब्लैकसॉइल इंडिया क्रेडिट फंड II' का पूरा निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी ने ₹750 करोड़ की रकम 40 अलग-अलग बिजनेस में लगाई है। यह फंड के शुरुआती ₹500 करोड़ के कॉर्पस (corpus) का 1.5 गुना है। कंपनी ने यह सफलता 10 सफल एग्जिट (exits) से वापस आए कैपिटल (capital) को फिर से निवेश करके हासिल की है। इस तरह, बिना अतिरिक्त कैपिटल कॉल (capital call) के फंड का दायरा बढ़ाया गया।
कहां-कहां हुआ निवेश?
इस फंड का पोर्टफोलियो कई हाई-ग्रोथ वाले सेक्टर्स में फैला हुआ है। इसमें कंज्यूमर और इंटरनेट बिजनेस सबसे ज्यादा 35% हिस्सा रखते हैं। फिनटेक (Fintech) और फाइनेंशियल सर्विसेज (financial services) 25% की हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर हैं। बाकी का हिस्सा मोबिलिटी, सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS), डीपटेक (deeptech) और हेल्थकेयर में बांटा गया है। पोर्टफोलियो में Mintoak, Euler Motors, Curefoods, Bluestone, AgroStar और Progcap जैसी कंपनियां शामिल हैं। यह विविधीकरण (diversification) ग्रोथ-स्टेज की कंपनियों को परफॉर्मिंग क्रेडिट (performing credit) देने पर कंपनी के फोकस को दर्शाता है। ऐसी कंपनियों को अक्सर टाइट क्रेडिट साइकल्स (tight credit cycles) के दौरान पारंपरिक बैंक लोन मिलने में दिक्कत होती है।
प्राइवेट क्रेडिट का बढ़ता चलन
ब्लैकसॉइल, जो एक प्राइवेट एंटिटी (private entity) है और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है, अल्टरनेटिव फाइनेंसिंग मार्केट (alternative financing market) में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। जुलाई 2026 में, कंपनी ने क्रेडिट फेयर (Credit Fair) के सोलर फाइनेंसिंग बिजनेस का अधिग्रहण (acquisition) किया था। यह कदम ग्रीन एनर्जी (green energy) फाइनेंसिंग में विविधता लाने की कंपनी की मंशा को दिखाता है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय स्टार्टअप्स के लिए प्राइवेट क्रेडिट एक मुख्य विकल्प बनता जा रहा है, खासकर जब बैंक क्रेडिट ग्रोथ धीमी हो रही है या बैंक अधिक सतर्क हो रहे हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
हालांकि कंपनी विस्तार कर रही है, निवेशकों को कुछ खास जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए। फंड का पोर्टफोलियो कंज्यूमर और फिनटेक जैसे सेक्टर्स पर ज्यादा केंद्रित है, जो मार्केट साइकल्स और कंज्यूमर खर्च की आदतों में बदलाव के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। इन सेक्टर्स में किसी भी मंदी का कंपनियों की रीपेमेंट क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, प्राइवेट क्रेडिट मैनेजमेंट में जटिल डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) से निपटना शामिल है, जिनमें लिक्विडिटी रिस्क (liquidity risk) होता है। जुलाई 2026 में, कंपनी को एक एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोविंग (external commercial borrowing) फैसिलिटी की सर्विसिंग में मामूली ऑपरेशनल देरी का सामना करना पड़ा था। हालांकि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (credit rating agencies) ने बाद में रिपोर्ट किया कि कंपनी की कोर क्रेडिट प्रोफाइल (core credit profile) बरकरार है, इस घटना ने अल्टरनेटिव क्रेडिट फंड्स को मैनेज करने में आने वाली ऑपरेशनल जटिलताओं और एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) को उजागर किया है। भविष्य में, जब कंपनी नए स्पेशलाइज्ड क्रेडिट प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, तो पोर्टफोलियो कंपनियों के प्रदर्शन और रीपेमेंट क्षमता पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
