BlackRock अपना **$2.3 बिलियन** का BUIDL टोकेनाइज्ड फंड अब मेनस्ट्रीम फाइनेंशियल सिस्टम में ला रहा है। ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए कंपनी का मकसद ट्रेडिंग को तेज करना और इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट को कम करना है, हालांकि रेगुलेटरी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
ब्लॉकचेन से बदलेगी फाइनेंस की 'प्लंबिंग'
दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजर BlackRock अब ट्रेडिशनल फाइनेंस के कामकाज के तरीके को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। अभी तक वॉल स्ट्रीट पुराने और धीमे सिस्टम पर निर्भर है, जिससे ट्रेड सेटलमेंट और कोलैटरल मैनेजमेंट में काफी समय लगता है। ब्लॉकचेन के इस्तेमाल से इन ट्रांजेक्शन को न केवल तेज, बल्कि ज्यादा पारदर्शी भी बनाया जा सकेगा।
कोलैटरल मैनेजमेंट में नया दौर
2024 की शुरुआत में लॉन्च हुआ BUIDL फंड एसेट्स को डिजिटल टोकन के रूप में पेश करता है। मौजूदा सिस्टम में किसी ट्रेड के लिए कोलैटरल (जमानत) देने हेतु संस्थाओं को अक्सर अपने मौजूदा निवेश बेचने पड़ते हैं, जिससे नुकसान होता है। अब इस डिजिटल फंड के जरिए संस्थाएं अपने एसेट्स को लिक्विडेट किए बिना टोकन को कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगी, जिससे मार्केट में पूंजी लगातार बनी रहेगी।
चुनौतियां और राह की मुश्किलें
सब कुछ इतना आसान नहीं है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) और इंटरनेशनल स्वैप्स एंड डेरिवेटिव्स एसोसिएशन (ISDA) ने इस बदलाव को लेकर कुछ बड़े जोखिम भी जताए हैं। वर्तमान फाइनेंशियल लैंडस्केप काफी बिखरा हुआ है और अलग-अलग ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के बीच बेहतर तालमेल की कमी है। इसके अलावा, डिजिटल एसेट्स के क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन पर कानूनी स्पष्टता का अभाव निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
आगे का रास्ता
फिलहाल इस BUIDL फंड में लगभग $2.3 बिलियन की एसेट वैल्यू है। BlackRock अब इसे अमेरिका, यूरोप और हॉन्ग-कॉन्ग में और विस्तार देने की योजना बना रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रेडिशनल इंस्टीट्यूशन्स बिना किसी भारी-भरकम नए इंफ्रास्ट्रक्चर के इस बदलाव को कितनी तेजी से अपना पाते हैं।
