बिहार के कड़े नियम: सेक्टर पर चौतरफा असर
बिहार में माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए कड़े नियम लागू होने से भारतीय माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आया है। यह कदम राज्य सरकारों के बढ़ते दखल को दर्शाता है। जहां इससे कंपनियों के लिए ऑपरेशनल और कंप्लायंस का बोझ बढ़ेगा, वहीं मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियां अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत कर सकती हैं। Ujjivan Small Finance Bank और Utkarsh Small Finance Bank जैसी संस्थाएं इन बदलावों से कैसे निपटती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
नए बिल की मुख्य बातें
बिहार विधानसभा ने 'माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (मनी लेंडिंग का रेगुलेशन और जबरन वसूली की रोकथाम) बिल, 2026' पारित किया है। इसके तहत, RBI से लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को भी अब राज्य वित्त विभाग से पूर्व मंजूरी लेनी होगी और राज्य-स्तरीय रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन के बिना काम करना एक आपराधिक जुर्म होगा, जिसमें जेल या जुर्माने की सज़ा का प्रावधान है। यह कानून बढ़ते लोन डिफॉल्ट्स और उधारकर्ताओं पर कर्ज के बोझ को कम करने के लिए लाया गया है, क्योंकि हालिया आंकड़ों के अनुसार बिहार में माइक्रोफाइनेंस लोन सबसे ज्यादा बकाया हैं और कर्ज चुकाने का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।
विश्लेषकों की नजर में क्या है स्थिति?
भारतीय माइक्रोफाइनेंस सेक्टर एक अहम मोड़ पर खड़ा है। हालिया तनाव के बाद अब स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन नए रेगुलेटरी दबाव भी सामने हैं। अक्टूबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर 30 दिन से अधिक के पोर्टफोलियो एट रिस्क (PAR) 6.2% थे, जो बिहार में 7.2% थे। वहीं, 90 दिन से अधिक के PAR राष्ट्रीय स्तर पर 4.8% थे। हालांकि, उम्मीद है कि कलेक्शन में सुधार और नए लोन के लिए घटते स्ट्रेस पूल से सेक्टर उबर रहा है।
प्रमुख कंपनियों पर असर
इस बदलते माहौल में, Ujjivan Small Finance Bank, जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹11,946.2 करोड़ है और P/E रेश्यो 24.18 के आसपास है, को विश्लेषकों से 'बाय' (Buy) की मजबूत सलाह मिली है। इसके शेयर में पिछले साल सकारात्मक प्रदर्शन देखा गया है। Fusion Micro Finance, जिसका मार्केट कैप ₹3,055 करोड़ है, को रेवेन्यू में गिरावट और -11.64 के नेगेटिव P/E रेश्यो जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Utkarsh Small Finance Bank, जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹2,637 करोड़ है, का भी 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) कंसेंसस है, लेकिन -2.72 का नेगेटिव P/E रेश्यो और हालिया [ICRA]A (Negative) रेटिंग डाउनग्रेड चिंता का विषय है।
जोखिम और चिंताएं
बिहार के नियम उन उधारदाताओं के लिए खास तौर पर जोखिम भरे हैं जो राज्य पर बहुत अधिक केंद्रित हैं। यह राज्य भारत की कुल MFI लोन बुक का 15-16% है। Utkarsh Small Finance Bank, जिसका बिहार में सबसे अधिक एक्सपोज़र है, को अपने नेगेटिव P/E और रेटिंग डाउनग्रेड के कारण जांच के दायरे में रखा गया है। Fusion Micro Finance में लगातार रेवेन्यू में गिरावट और नेगेटिव ROE (-54.5%) और ROCE (-2.96%) जैसी समस्याएं इसके स्ट्रक्चरल कमजोरियों को उजागर करती हैं। Ujjivan SFB की 'बाय' रेटिंग और सकारात्मक स्टॉक प्रदर्शन उत्साहजनक है, लेकिन इसका P/E रेश्यो अभी भी अधिक है। कुल मिलाकर, माइक्रोफाइनेंस में डिफॉल्ट्स का बढ़ना उधारकर्ताओं की आर्थिक झटकों के प्रति कमजोरी को दर्शाता है।
आगे का रास्ता
विश्लेषकों का माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए सतर्कतापूर्ण आशावादी नजरिया है। उम्मीद है कि एसेट क्वालिटी में सुधार और लिक्विडिटी सामान्य होने से Q1 FY27 तक सामान्य ग्रोथ की ओर वापसी होगी। मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि ये कंपनियां कैसे बढ़े हुए कंप्लायंस लागतों और बिहार जैसे प्रमुख बाजारों में धीमी ग्रोथ को मैनेज करती हैं, साथ ही सेक्टर की रिकवरी में उभरते अवसरों का लाभ उठाती हैं।