बिहार सरकार ने बैंकों की लेंडिंग पर नज़र रखने के लिए एक नया 100-पॉइंट इंडेक्स पेश किया है। सितंबर 2026 तक राज्य के **₹4.95 लाख करोड़** के सालाना क्रेडिट लक्ष्य का केवल **38%** ही पूरा हो पाया है, जिसके बाद सरकार ने बैंकों को ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटने का फैसला किया है।
बिहार सरकार ने राज्य में काम कर रहे बैंकों की लेंडिंग एफिशिएंसी (Lending Efficiency) को ट्रैक करने के लिए एक नई '100-पॉइंट परफॉर्मेंस इंडेक्स' व्यवस्था लागू की है। इस नए फ्रेमवर्क के तहत बैंकों को तीन जोन में बांटा गया है—ग्रीन (बेहतरीन), येलो (औसत), और रेड (कमजोर प्रदर्शन)। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 11 बैंकों ने 'ग्रीन' दर्जा हासिल किया है, जबकि कई पब्लिक सेक्टर बैंक 'रेड जोन' में आ गए हैं, जिन्हें अपने प्रदर्शन में तेजी से सुधार करने की चेतावनी दी गई है।
लेंडिंग का हाल और लक्ष्य
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए बिहार ने ₹4.95 लाख करोड़ के कुल क्रेडिट डिस्टर्ब्यूशन का टारगेट रखा है। 30 सितंबर 2026 तक बैंकिंग सेक्टर ने सिर्फ ₹1.89 लाख करोड़ ही बांटे हैं, जो कुल लक्ष्य का 38.25% है। पिछले साल के मुकाबले इसमें ₹46,228 करोड़ की बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन राज्य सरकार की नजर में यह रफ्तार सुस्त है।
सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन
इंडेक्स के मुताबिक, MSME सेक्टर में काम बेहतर रहा है और यहां ₹84,091 करोड़ बांटे गए हैं, जो सालाना लक्ष्य का 52% है। वहीं, एग्रीकल्चर सेक्टर में स्थिति चिंताजनक है, जहां लक्ष्य का सिर्फ 28% यानी ₹43,967 करोड़ ही लोन के तौर पर मिल पाया है।
डिपॉजिट्स पर सख्त निर्देश
बिहार सरकार ने एक और बड़ा निर्देश जारी किया है। अब बैंकों को राज्य से जुटाए गए डिपॉजिट्स (Deposits) का पैसा बिहार के विकास में ही लगाना होगा। सरकार का साफ कहना है कि स्थानीय स्तर पर जमा किया गया पैसा दूसरे राज्यों में नहीं भेजा जा सकेगा। इन्वेस्टर्स के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि भविष्य में कौन से बैंक अपनी लेंडिंग बढ़ाकर रेड जोन से बाहर निकलते हैं, क्योंकि राज्य सरकार की निगरानी अब और कड़ी हो गई है।
