चुनाव नतीजों से बाजार में नई उम्मीद
पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों ने शेयर बाजार में एक नई उम्मीद जगा दी है। अब बाज़ार का फोकस इंडस्ट्रियल ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर शिफ्ट हो सकता है, जिससे बंगाल से जुड़े शेयरों में तेजी आ सकती है। CESC Limited, ITC Limited जैसी कंपनियों पर भी निवेशकों की नजरें होंगी, साथ ही KEC International और NCC Limited जैसी इंफ्रा फर्म्स में भी नए सिरे से दिलचस्पी देखने को मिल सकती है। हालांकि, असली असर पॉलिसी के अमल और लगातार निवेश पर टिका रहेगा।
Bandhan Bank की शानदार Q4 परफॉरमेंस
Bandhan Bank के शेयरों में अप्रैल महीने में जबरदस्त उछाल देखा गया, जो करीब छह साल में सबसे बड़ी मासिक बढ़त थी। बैंक ने Q4 FY26 में ₹534 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 68% ज्यादा है। प्रोविजन्स (Provisions) में कमी और नॉन-इंटरेस्ट इनकम में बढ़ोतरी का इसमें बड़ा योगदान रहा। बैंक के ग्रॉस एडवांसेज (Gross Advances) 13% बढ़कर ₹1.54 लाख करोड़ और डिपॉजिट्स (Deposits) 10% बढ़कर ₹1.66 लाख करोड़ हो गए। एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ, ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) 3.3% और नेट एनपीए (Net NPA) 1% पर आ गया।
वैल्यूएशन गैप और IPO मार्केट की सुस्ती
अपनी शानदार रिकवरी के बावजूद, Bandhan Bank अभी भी अपने बुक वैल्यू ₹157 प्रति शेयर के करीब ट्रेड कर रहा है और मार्च 2018 के IPO प्राइस ₹490 से काफी नीचे है। एनालिस्ट्स FY27-28 के लिए 16% के आसपास लोन ग्रोथ और 13% से ऊपर Return on Equity (ROE) का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन Q4 FY26 में ROE सिर्फ 9% रहा, जो इंडस्ट्री एवरेज से कम है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो (P/E ratio) करीब 15.0 है, जो HDFC Bank (21.29) जैसे साथियों से कम है।
India का IPO मार्केट फिलहाल वैल्यूएशन गैप के चलते सुस्त पड़ा है। अब सबकी निगाहें SBI Funds Management पर हैं, जो ₹15,000 करोड़ का बड़ा इश्यू लाने की तैयारी में है। यह देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) में से एक है, जिसके AUM (Assets Under Management) ₹16.32 लाख करोड़ से ज़्यादा हैं। इस बड़े इश्यू से मार्केट सेंटीमेंट को बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
Bandhan Bank और बाजार के लिए जोखिम
मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद, Bandhan Bank के सामने कुछ चुनौतियां हैं। इसका ROE अभी भी इंडस्ट्री एवरेज से कम है, जो कैपिटल की एफिशिएंसी पर सवाल उठाता है। डिपॉजिट्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भविष्य की ग्रोथ और फंडिंग कॉस्ट को प्रभावित कर सकती है। माइक्रोफाइनेंस और अनसिक्योर्ड लोन पर फोकस के चलते क्रेडिट रिस्क पर नजर रखनी होगी।
बाजार के लिए, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का आउटफ्लो एक बड़ी चिंता है, जिन्होंने अकेले अप्रैल में करीब ₹70,100 करोड़ निकाले हैं। वहीं, क्रूड ऑयल की कीमतें $110 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा रही हैं। ये मैक्रो फैक्टर्स किसी भी चुनावी रैली के असर को सीमित कर सकते हैं।
आगे का आउटलुक
Bandhan Bank से FY27 और FY28 में 16% लोन ग्रोथ और 13% से ज़्यादा ROE की उम्मीद है, जो उसकी एफिशिएंसी और कॉम्पिटिशन से निपटने की क्षमता पर निर्भर करेगा। SBI Funds Management का IPO मार्केट के लिए एक पॉजिटिव कैटलिस्ट साबित हो सकता है। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि लंबी अवधि में बाजार की ग्रोथ के लिए मजबूत कॉर्पोरेट अर्निंग्स, स्टेबल लिक्विडिटी और ग्लोबल इकोनॉमिक स्टेबिलिटी की जरूरत होगी।
