Barclays India अपने प्राइवेट बैंकिंग बिजनेस को अगले कुछ सालों में सालाना **25%** तक बढ़ाने की तैयारी में है। बैंक का फोकस अमीर फैमिली बिजनेसेज पर रहेगा। हालांकि, कंपनी के ग्लोबल वेल्थ डिविजन के प्रॉफिट में **20%** की गिरावट आई है और लोकल बिजनेस भी टाइट प्रॉफिट मार्जिन से जूझ रहा है।
Barclays India का महत्वाकांक्षी प्लान
Barclays India ने देश में अपने प्राइवेट बैंकिंग बिजनेस को तेजी से फैलाने की योजना बनाई है। बैंक का लक्ष्य अगले 3 से 5 सालों में हर साल 25% की ग्रोथ हासिल करना है। मार्च 2026 में भारत के प्राइवेट बैंक हेड बने Adrish Ghosh के नेतृत्व में, बैंक अब सिर्फ प्रोडक्ट बेचने के बजाय, अमीर फैमिली बिजनेसेज के लिए ज्यादा कॉम्प्रिहेंसिव और लॉन्ग-टर्म एडवाइजरी सर्विस पर फोकस करेगा।
ग्लोबल नेटवर्क का होगा इस्तेमाल
बैंक अपने ग्लोबल नेटवर्क का इस्तेमाल करेगा, जिसमें लंदन, दुबई और सिंगापुर जैसे हब शामिल हैं। इसका मकसद ऐसे क्लाइंट्स को आकर्षित करना है जिन्हें इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट, ऑफशोर स्ट्रक्चरिंग और ट्रस्ट सर्विसेज की जरूरत है। भारत में फैमिली बिजनेस सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। 2026 Barclays Private Clients Hurun India Most Valuable Family Businesses List के अनुसार, देश की टॉप 300 फैमिली-ओन्ड कंपनियों का वैल्यूएशन अब $1.46 ट्रिलियन है, जो पिछले दो सालों में 27% से ज्यादा बढ़ा है।
प्रॉफिट में गिरावट और टाइट मार्जिन
ग्रोथ के इन लक्ष्यों के बावजूद, कंपनी को काफी फाइनेंशियल दबाव का सामना करना पड़ रहा है। Barclays PLC ने हाल ही में 2026 की पहली छमाही में अपने ग्लोबल प्राइवेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट डिविजन के प्रॉफिट में 20% की गिरावट दर्ज की है। बैंक का कहना है कि ऑपरेटिंग खर्चों में बढ़ोतरी और महंगाई के कारण प्रॉफिट पर असर पड़ा है। कंपनी अपनी ग्लोबल स्ट्रैटेजी 'Simpler, Better and More Balanced' के तहत इन खर्चों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है।
भारतीय बाजार की अपनी चुनौतियां
भारत में, लोकल एंटिटी Barclays Investments and Loans (India) Limited को भी स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह बिजनेस मुख्य रूप से लोन-अगेन्स्ट-सिक्योरिटी प्रोडक्ट्स पर निर्भर करता है, जिनमें नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) काफी कम होता है। प्राइवेट बैंकिंग स्पेस में कॉम्पिटिशन, कम मार्जिन और हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट, प्रॉफिट बनाए रखना एक मुश्किल काम बना देते हैं। बैंक को हाई-नेट-वर्थ क्लाइंट्स को आकर्षित करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को सुधारने के बीच बैलेंस बनाना होगा।
आगे क्या देखना होगा?
शेयरहोल्डर्स के लिए यह देखना अहम होगा कि बैंक क्लाइंट्स के साथ होलीस्टिक रिलेशनशिप बनाने की अपनी स्ट्रैटेजी को कैसे लागू करता है, बिना कॉस्ट को और बढ़ाए। इन्वेस्टर्स को यह भी देखना चाहिए कि यह डिविजन इंटरेस्ट रेट साइकल और कैपिटल मार्केट की वोलैटिलिटी को कैसे मैनेज करता है, क्योंकि ये फैक्टर सीधे तौर पर बैंक के भारतीय ऑपरेशंस को प्रभावित करते हैं।
