Barclays ने भारत में अपने इक्विटी कैपिटल मार्केट्स (ECM) ऑपरेशन्स को दोबारा शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी देश में बढ़ते IPO मार्केट का फायदा उठाने के लिए अपनी कॉर्पोरेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं के साथ इस नए बिजनेस को जोड़ रही है।
बाजार में नई हलचल
लंदन स्थित दिग्गज बैंक Barclays अब भारतीय बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है। लगभग 10 साल के लंबे अंतराल के बाद, बैंक फिर से घरेलू इक्विटी कैपिटल मार्केट्स (ECM) में अपनी अंडरराइटिंग कैपेबिलिटी को जीरो से खड़ा कर रहा है। यह कदम भारत में आ रहे ताबड़तोड़ IPOs के दौर को देखते हुए उठाया गया है, जहां केवल पिछले साल बैंकों ने फीस के तौर पर करीब USD 417 मिलियन की कमाई की थी।
रणनीति और विस्तार
ग्रुप CEO C.S. Venkatakrishnan और Barclays India के CEO प्रमोद कुमार का मानना है कि बैंक की लोकल स्ट्रेटजी में इक्विटी प्लेटफॉर्म की कमी एक बड़ी चुनौती थी। बैंक पहले से ही भारत में M&A और कॉर्पोरेट बैंकिंग में मजबूती बनाए हुए है। अब इक्विटी सर्विसेज के जुड़ने से बैंक अपने क्लाइंट्स को एक कंप्लीट फाइनेंशियल पैकेज दे पाएगा।
पिछले 5 सालों में Barclays ने भारत में £500 मिलियन से अधिक का निवेश किया है। बैंक इसके लिए GIFT सिटी के टैक्स इंसेंटिव्स का भी पूरा फायदा उठाने की योजना बना रहा है।
चुनौतियां और रिस्क
हालांकि, भारत का ECM स्पेस काफी प्रतिस्पर्धी है, जहां पहले से ही कई ग्लोबल और लोकल खिलाड़ी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। इसके अलावा, RBI की गाइडलाइंस का पालन करना और अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बनाए रखना बैंक के लिए बड़ी चुनौती होगी। Barclays Investments & Loans (India) Private Limited (BILIPL) का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि रेगुलेटरी बदलाव बैंक के लोन बुक को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए अनुपालन (Compliance) पर कड़ी नजर रखना बैंक की सफलता के लिए अनिवार्य होगा।
