Barclays Bank PLC ने अपने इंडियन ऑपरेशंस को मजबूत करने के लिए **₹1,500 करोड़** का भारी निवेश किया है। इस फंड का इस्तेमाल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और प्राइवेट बैंकिंग डिवीजनों को विस्तार देने के लिए किया जाएगा।
बाजार में वापसी की तैयारी
इस निवेश का एक मुख्य हिस्सा बैंक की इक्विटी कैपिटल मार्केट्स (ECM) में फिर से वापसी से जुड़ा है। करीब एक दशक पहले इस बिजनेस से पीछे हटने के बाद, Barclays अब अपनी टीम को फिर से खड़ा कर रही है ताकि कंपनियों को शेयर मार्केट के जरिए फंड जुटाने में मदद की जा सके। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब भारतीय बाजार में पब्लिक लिस्टिंग्स और फंड रेजिंग का दौर जोरों पर है।
बैंक का पुराना रिकॉर्ड
बीते 5 सालों में यह बैंक द्वारा किया गया तीसरा सबसे बड़ा कैपिटल इन्फ्यूजन है। इससे पहले मार्च 2025 में बैंक ने ₹2,300 करोड़ और साल 2021 में ₹3,000 करोड़ का निवेश किया था। इस लेटेस्ट राउंड के साथ, भारत में Barclays की कुल इन्वेस्टेड कैपिटल और रिजर्व बढ़कर करीब ₹16,600 करोड़ पर पहुंच गए हैं।
क्या हैं चुनौतियां?
पैसा तो आ गया है, लेकिन मुकाबला आसान नहीं होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ECM सेगमेंट में दोबारा अपनी धाक जमाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वहां पहले से ही कई ग्लोबल और घरेलू बैंक जमे हुए हैं। बैंक की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी तेजी से क्लाइंट्स के भरोसे को जीत पाती है और कॉम्पिटिटिव मार्केट में अपनी जगह बना पाती है। ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक अस्थिरता और जियो-पॉलिटिकल रिस्क भी इस सफर में बड़ी चुनौतियां साबित हो सकते हैं।
