भारतीय बैंक्स की RBI से मांग: $100 मिलियन फॉरेक्स कैप से ₹18 बिलियन का नुकसान, प्रॉफिट पर असर!

BANKINGFINANCE
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AuthorMehul Desai|Published at:
भारतीय बैंक्स की RBI से मांग: $100 मिलियन फॉरेक्स कैप से ₹18 बिलियन का नुकसान, प्रॉफिट पर असर!
Overview

भारतीय बैंकों ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से ऑनशोर फॉरेन एक्सचेंज (Forex) पोजिशन्स पर नए **$100 मिलियन** के कैप को थोड़ा ढील देने की गुहार लगाई है। बैंक चेतावनी दे रहे हैं कि 10 अप्रैल तक इसे लागू करने से उन्हें मौजूदा पोजिशन्स बेचनी पड़ सकती हैं, जिससे **$10 से $18 बिलियन** तक का भारी ट्रेडिंग लॉस हो सकता है और इस तिमाही के प्रॉफिट पर भी बुरा असर पड़ेगा।

RBI के नए फॉरेक्स नियम पर बैंकों का कड़ा ऐतराज

भारतीय बैंकों के सीनियर ट्रेजरी अधिकारी, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा नेट ओपन फॉरेन एक्सचेंज पोजिशन्स (Net Open Forex Positions) के लिए लगाए गए नए $100 मिलियन के कैप को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सप्ताहांत पर RBI के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर इस नियम के तुरंत लागू होने से बैंक के प्रॉफिट पर पड़ने वाले गंभीर असर के बारे में अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।

बैंकों की मांग है कि RBI इस नए नियम को तुरंत लागू करने के बजाय कुछ समय बाद लागू करे। उन्होंने मौजूदा होल्डिंग्स को कम करने के लिए तीन महीने का एक्सटेंशन (extension) मांगा है। ये मौजूदा पोजिशन्स काफी बड़ी हैं, जो हर बैंक के लिए $250 मिलियन से $300 मिलियन तक हो सकती हैं।

RBI की चाल: गिरते रुपये को थामने की कोशिश

सेंट्रल बैंक ने यह कैप ऐसे समय में लगाया है जब हाल ही में भारतीय रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है और डॉलर के मुकाबले करीब 94.81 पर ट्रेड कर रहा है। RBI का मुख्य लक्ष्य बैंकों द्वारा ऑनशोर फॉरेन करेंसी एक्सपोजर (foreign currency exposure) को सीमित करके रुपये की गिरावट को रोकना है। पहले, बैंक अपनी कुल पूंजी (capital) का 25% तक नेट ओपन पोजीशन रख सकते थे, जो नए कैप से काफी ज्यादा था।

नए कैप का संभावित मार्केट फॉलआउट

अगर $100 मिलियन का कैप तय समय सीमा 10 अप्रैल तक लागू हो जाता है, तो भारतीय बैंकों को अनुमानित $10 बिलियन से $18 बिलियन डॉलर की होल्डिंग्स को बेचना पड़ सकता है। इस जबरन बिकवाली (forced selling) से बड़ा मार्क-टू-मार्केट ट्रेडिंग लॉस (Mark-to-market trading losses) हो सकता है, जो सीधे मौजूदा फाइनेंशियल क्वार्टर (Q4FY26) में रिकॉर्ड होगा और ट्रेजरी इनकम (treasury income) को सीधे तौर पर कम करेगा।

इस बदलाव से बैंकों के लिए करेंसी आर्बिट्रेज (currency arbitrage) से कमाई के अवसर भी खत्म हो सकते हैं। इसके अलावा, यह ट्रेडर्स को ऑफशोर मार्केट्स (offshore markets) में रुपये पर बियरिश दांव (bearish bets) लगाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, जहां ऐसे कोई कैप नहीं हैं। इससे विदेशी निवेशकों के लिए करेंसी हेजिंग कॉस्ट (currency hedging costs) बढ़ सकती है और ऑनशोर व ऑफशोर फॉरेक्स मार्केट्स के बीच कीमत का अंतर बढ़ सकता है, जिससे ट्रेजरी मैनेजर्स के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो जाएंगी।

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