Banking Trend: हाउसिंग लोन से ज्यादा NBFCs को मिल रहा है कर्ज, H1 FY27 में बदला बैंकों का रुख

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Banking Trend: हाउसिंग लोन से ज्यादा NBFCs को मिल रहा है कर्ज, H1 FY27 में बदला बैंकों का रुख

फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में भारतीय बैंकों ने हाउसिंग सेक्टर के बजाय NBFCs पर दांव लगाया है। बैंकों ने हाउसिंग लोन के **₹1.4 लाख करोड़** के मुकाबले NBFCs को **₹1.8 लाख करोड़** का भारी-भरकम कर्ज दिया है।

बैंकों की नई स्ट्रैटेजी

सितंबर 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो बैंकों का फोकस रिटेल होम बायर से हटकर होलसेल लेंडिंग की तरफ शिफ्ट होता दिख रहा है। कुल नॉन-फूड क्रेडिट ₹229 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो कि सालाना आधार पर 19.1% की ग्रोथ है। सर्विस सेक्टर में ₹4.9 लाख करोड़ का नया कर्ज दिया गया, जिसमें NBFCs को दिए गए कर्ज में 41.8% का जबरदस्त उछाल आया है, जिससे कुल आउटस्टैंडिंग क्रेडिट ₹22.5 लाख करोड़ हो गया है।

रिस्क मैनेजमेंट और सिक्योर लेंडिंग

बैंक अब रिस्क कम करने के लिए 'सिक्योर्ड लेंडिंग' (Secured Lending) पर जोर दे रहे हैं। गोल्ड ज्वैलरी के बदले दिए जाने वाले कर्ज में 82.6% यानी ₹1.2 लाख करोड़ और फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले लोन में 53.3% की बढ़त देखी गई है। बैंक लिक्विड एसेट्स को प्राथमिकता देकर बैलेंस शीट को डिफॉल्ट्स से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या है खतरा?

यह ट्रेंड NBFCs के लिए लिक्विडिटी के लिहाज से तो अच्छा है, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पहले ही बैंकों और NBFCs के बढ़ते कनेक्शन पर चिंता जता चुका है। यदि किसी बड़ी NBFC की एसेट क्वालिटी खराब होती है, तो इसका सीधा असर बैंकों की बैलेंस शीट पर पड़ सकता है।

इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी 19.5% के साथ स्थिर है और MSME सेक्टर में ₹1.6 लाख करोड़ की नई फंडिंग देखी गई है। अब निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या RBI आने वाले समय में बैंक-NBFC एक्सपोजर के लिए कोई कड़े नियम या रिस्क वेट्स (Risk Weights) लाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.