सितंबर अंत तक फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले लिए गए लोन का आंकड़ा बढ़कर **₹2.17 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है। इसमें **53%** का बड़ा उछाल देखा गया है, जिसके पीछे FCNR-B खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल मुख्य वजह है।
भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक दिलचस्प लेकिन गौर करने वाली हलचल देखी जा रही है। सितंबर 2026 तक फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले लोन लेने का सिलसिला पिछले साल के 14.3% की तुलना में तेजी से बढ़कर 53% पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि लोग अपनी सेविंग्स को गिरवी रखकर नकद फंड जुटाने में काफी सक्रिय हो गए हैं।
क्यों बढ़ रहा है ये लोन?
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ी वजह FCNR-B (Foreign Currency Non-Resident Bank) डिपॉजिट्स के जरिए अपनाई जा रही फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी है। निवेशक अपने फॉरेन करेंसी डिपॉजिट्स को गिरवी रखकर रुपया लोन ले रहे हैं, ताकि उस रकम को दूसरी हाई-यील्ड स्कीमों में निवेश किया जा सके। यानी, यह सिर्फ जरूरत का पैसा नहीं, बल्कि एक तरह का 'लेवरेज्ड बेट' है जो लोग खेल रहे हैं।
अन्य सेगमेंट में भी क्रेडिट का जाल
केवल एफडी ही नहीं, अन्य सेक्टरों में भी कर्ज की रफ्तार बेतहाशा है:
- गोल्ड लोन: इसमें 82.6% का जबरदस्त उछाल आया है और यह ₹5.77 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
- सर्विसेज सेक्टर: यहाँ 28.3% की ग्रोथ के साथ कुल क्रेडिट ₹64.9 लाख करोड़ हो गया है।
- कुल बैंकिंग क्रेडिट: पूरे सिस्टम में क्रेडिट का विस्तार 19.4% रहा, जो अब ₹229.9 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर है।
निवेशकों के लिए क्या है खतरा?
बैंकों की कमाई के लिहाज से तो यह अच्छा है, लेकिन निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स के लिए यह सतर्क होने का समय है। यदि आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं या गोल्ड जैसे कोलैटरल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, तो बैंकों पर क्रेडिट रिस्क बढ़ सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या Reserve Bank of India इस पर लगाम लगाने के लिए नियमों को कड़ा करेगा या यह ग्रोथ इसी तरह जारी रहेगी।
