Banks' Retail Loan: लोन रीक्लासिफिकेशन पर MFIN ने RBI से की शिकायत, निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Banks' Retail Loan: लोन रीक्लासिफिकेशन पर MFIN ने RBI से की शिकायत, निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?

बैंकों द्वारा माइक्रोफाइनेंस लोन को 'रिटेल' पोर्टफोलियो में दिखाने से माइक्रोफाइनेंस कर्ज में **28.5%** की गिरावट दर्ज की गई है। इंडस्ट्री बॉडी MFIN ने इसे लेकर RBI से शिकायत की है, क्योंकि इससे लोन का वास्तविक रिस्क प्रोफाइल छिप सकता है।

क्या है पूरा मामला?

भारतीय बैंकों द्वारा अपने लोन बुक की रिपोर्टिंग में एक बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहा है, जो अब रेगुलेटरी रडार पर आ गया है। बैंक बिना गारंटी वाले माइक्रोफाइनेंस लोन को अब 'स्टैंडर्ड रिटेल क्रेडिट' के रूप में रीक्लासिफाई कर रहे हैं। माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (MFIN) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से शिकायत की है कि यह तरीका माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के वास्तविक साइज को छुपाता है और रेगुलेटरी नियमों का उल्लंघन कर सकता है।

रीक्लासिफिकेशन का खेल

RBI के मौजूदा गाइडलाइंस के मुताबिक, ₹3 लाख तक की सालाना आय वाले परिवारों को दिए गए अनसिक्योर्ड लोन माइक्रोफाइनेंस की श्रेणी में आते हैं। इन लोंस को 'रिटेल' के खाते में डालकर बैंक अपने पोर्टफोलियो को ज्यादा साफ और कम रिस्की दिखाते हैं।

जून 2026 की तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, बैंकों का रिपोर्टेड माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 28.5% गिरकर ₹83,080 करोड़ पर आ गया है। इसके उलट, NBFC-MFIs ने अपना मार्केट शेयर बढ़ाकर 44.3% कर लिया है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

अगर RBI बैंकों को इन लोंस को वापस माइक्रोफाइनेंस कैटेगरी में दिखाने का निर्देश देता है, तो बैंकों की रिस्क रिपोर्टिंग बदल सकती है। इससे अनसिक्योर्ड लोन का खुलासा होगा, जो आर्थिक अस्थिरता के समय बैंकों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। साथ ही, बैंकों ने अपना औसत लोन टिकट साइज 15% बढ़ाकर ₹63,147 कर दिया है, जो दर्शाता है कि बैंक अब छोटे कर्जदारों से दूर हटकर सिर्फ बड़े ग्राहकों पर ध्यान दे रहे हैं।

अब सबकी नजरें RBI की अगली कमेंट्री पर हैं कि क्या रेगुलेटर लोन क्लासिफिकेशन में पारदर्शिता के लिए कड़े नियम लाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.