US Crypto Bill अटकी! बैंकों और क्रिप्टो फर्मों में छिड़ी जंग, नवाचार (Innovation) पर मंडराया खतरा!

BANKINGFINANCE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
US Crypto Bill अटकी! बैंकों और क्रिप्टो फर्मों में छिड़ी जंग, नवाचार (Innovation) पर मंडराया खतरा!
Overview

अमेरिका में डिजिटल एसेट्स (Digital Assets) को लेकर लाया गया 'U.S. Digital Asset Market Clarity Act' फिलहाल सीनेट (Senate) में अटक गया है। इस बिल के रुकने की मुख्य वजह स्टेबलकॉइन यील्ड (Stablecoin Yield) पर चल रहा बड़ा विवाद है। JPMorgan के CEO Jamie Dimon और बड़े बैंक, क्रिप्टो फर्मों से इन यील्ड्स को बैंक जैसे ही नियम-कायदों के तहत लाने की मांग कर रहे हैं, जिससे बिल के पास होने पर खतरा मंडरा रहा है।

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नियमों की लड़ाई में अटका क्रिप्टो बिल

यह 'U.S. Digital Asset Market Clarity Act' जनवरी 2026 से ही सीनेट बैंकिंग कमेटी (Senate Banking Committee) में विचाराधीन है। बिल के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा स्टेबलकॉइन पर मिलने वाले यील्ड (Yield) या ब्याज को लेकर है। JPMorgan के CEO Jamie Dimon लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि क्रिप्टो फर्मों द्वारा स्टेबलकॉइन पर दिए जाने वाले यील्ड को भी वैसे ही कड़े नियमों के तहत लाया जाए, जैसे पारंपरिक बैंकों पर लागू होते हैं। Dimon का कहना है कि यह असल में ब्याज वाली जमाओं (Interest-bearing deposits) जैसा ही है और एक अलग, कम रेगुलेटेड सिस्टम वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकता है। मार्च 2026 की शुरुआत में, अमेरिकन बैंकर्स एसोसिएशन (American Bankers Association) ने व्हाइट हाउस द्वारा लाए गए समझौतों को भी खारिज कर दिया।

इस बीच, JPMorgan Chase (JPM) का P/E Ratio मार्च 2026 की शुरुआत में लगभग 14.3-15.01 के आसपास बना हुआ है। वहीं, क्रिप्टो एक्सचेंज Coinbase Global (COIN) का P/E Ratio इस दौरान काफी ज़्यादा, लगभग 39.50 से 44.42 के बीच रहा है। पिछले एक साल में Coinbase के शेयर में करीब 9.30% की गिरावट भी देखी गई है, जो इस रेगुलेटरी अनिश्चितता का असर दिखाती है।

पूर्व CFTC चेयरमैन Christopher Giancarlo का मानना है कि इस डिजिटल एसेट्स (Digital Assets) रेगुलेशन की स्पष्टता की ज़रूरत बैंकों को क्रिप्टो कंपनियों से कहीं ज़्यादा है। उनका कहना है कि बैंक अपने पुराने सिस्टम को बदलते हुए नए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में खरबों डॉलर का निवेश करना चाहते हैं, लेकिन रेगुलेशन की कमी के चलते वे पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। CLARITY Act में SEC और CFTC के अधिकार क्षेत्र को परिभाषित किया जाना है, लेकिन इस देरी के कारण बैंक डिजिटल एसेट्स में बड़ा निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं। इस बीच, यूरोप और एशिया के देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और अमेरिका पिछड़ सकता है।

अमेरिकन बैंकर्स एसोसिएशन जैसे संगठन क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को स्टेबलकॉइन यील्ड देने से रोकने के लिए लॉबिंग (Lobbying) कर रहे हैं। वे इसे 'फेयर कंपटीशन' और 'सिस्टमिक रिस्क' का मामला बता रहे हैं। उनका तर्क है कि इस तरह के यील्ड से खरबों डॉलर की जमा राशि (Deposits) पारंपरिक बैंकों से हट सकती है। इस तरह, बैंक सिर्फ हितधारक (Stakeholder) नहीं, बल्कि डिजिटल एसेट्स को वित्तीय सिस्टम में शामिल करने के नियमों को तय करने वाले 'गेटकीपर' (Gatekeeper) की भूमिका में आ गए हैं।

JPMorgan Chase, Bank of America जैसे बड़े बैंक स्टेबलकॉइन यील्ड्स के खिलाफ इस लॉबिंग के ज़रिए CLARITY Act को रोके हुए हैं। इस रणनीति पर Eric Trump ने कहा है कि यह 'एंटी-रिटेल, एंटी-कंज्यूमर और एंटी-अमेरिकन' है। इसका मकसद बैंकों के लो-इंटरेस्ट रेट डिपॉजिट एकाधिकार को बनाए रखना है, जबकि क्रिप्टो सेक्टर में नवाचार (Innovation) को दबाना है। अगर यह रेगुलेटरी अनिश्चितता बनी रही, तो अमेरिका वित्तीय तकनीक (Financial Technology) में अपनी लीडरशिप खो सकता है और पारंपरिक बैंक पुरानी तकनीक पर निर्भर रह जाएंगे। पूर्व CFTC चेयरमैन Giancarlo ने चेतावनी दी है कि इससे अमेरिकी बैंक 'बैंकिंग जगत के Kodak या Blockbuster' बन सकते हैं।

फिलहाल, CLARITY Act के पास होने की टाइमलाइन को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं। कुछ JPMorgan के विश्लेषकों को साल 2026 के मध्य तक इसकी मंजूरी की उम्मीद है, तो ट्रेजरी सेक्रेटरी ने वसंत 2026 तक के हस्ताक्षर का संकेत दिया है। हालांकि, सीनेट बैंकिंग कमेटी की बैठक कई बार टल चुकी है और अप्रैल 2026 की एक महत्वपूर्ण समय सीमा नजदीक है। स्टेबलकॉइन यील्ड्स पर जारी यह जंग ही मुख्य रुकावट बनी हुई है। अगर यह बिल अटकता रहा, तो डिजिटल एसेट मार्केट में अनिश्चितता बनी रहेगी और संस्थागत पूंजी (Institutional Capital) सतर्क रहेगी, जिसका फायदा यूरोप और एशिया के रेगुलेटेड मार्केट्स को मिल सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.