Fitch Ratings ने Bank of India (BOI) की लॉन्ग-टर्म इश्यूअर डिफॉल्ट रेटिंग (IDR) को 'BBB-' पर स्थिर (Stable) आउटलुक के साथ कन्फर्म किया है। रेटिंग एजेंसी ने बैंक की वायबिलिटी रेटिंग (VR) को 'bb-' से अपग्रेड करके 'bb' कर दिया है। यह अपग्रेड BOI के रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल परफॉरमेंस में हुए सुधारों को दर्शाता है, जिसमें बेहतर एसेट क्वालिटी (Asset Quality), बढ़ी हुई कैपिटलाइजेशन (Capitalization) और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) शामिल है। इन सब में मजबूत सरकारी समर्थन (Government Backing) का भी बड़ा हाथ रहा है।
बैंक की ओर से जारी किए गए आंकड़े भी इन सुधारों की पुष्टि करते हैं। फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) के लिए बैंक का नेट प्रॉफिट ₹9,219 करोड़ रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर 24 (FY24) के ₹6,318 करोड़ की तुलना में काफी अच्छी बढ़त है। 31 मार्च 2025 तक, बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 17.77% पर मजबूत था, जो यह सुनिश्चित करता है कि बैंक अप्रत्याशित नुकसानों को झेलने में सक्षम है। वहीं, टियर-I कैपिटल 15.47% पर था।
एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी Bank of India ने उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। 31 मार्च 2025 तक, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) रेशियो घटकर 3.27% रह गया, जो एक साल पहले 4.98% था। इसी तरह, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) रेशियो भी सुधरकर 0.82% पर आ गया, जो पिछले साल 1.22% था।
यह रेटिंग एक्शन इस बात का संकेत देता है कि Fitch को Bank of India की स्टैंडअलोन क्रेडिट वर्थिनेस (Creditworthiness) पर अब पहले से ज्यादा भरोसा है। IDR का 'BBB-' पर स्थिर आउटलुक यह बताता है कि बैंक से अपने सभी वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की उम्मीद की जाती है, जिसके पीछे भारत सरकार से मिलने वाले मजबूत समर्थन की अहम भूमिका है।
निवेशकों के लिए, इस अपग्रेड का मतलब यह हो सकता है कि बैंक के डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) से जुड़े जोखिम को कम करके आंका जाएगा और उसकी इक्विटी (Equity) के लिए एक स्थिर भविष्य की उम्मीद है। यह इस बात का संकेत है कि बैंक अपने परिचालन माहौल (Operating Environment) में अच्छी तरह से काम कर रहा है।
Bank of India, जिसका इतिहास 1906 से जुड़ा है और जो 1969 में नेशनललाइजेशन के बाद से सरकारी नियंत्रण में है, को सरकार से लगातार कैपिटल इन्फ्यूजन (Capital Infusion) मिलता रहा है। FY17 से FY21 के बीच बैंक में ₹29,794 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया था। यही सरकारी समर्थन बैंक की रेटिंग का मुख्य आधार है, जो इसके IDR को भारत की सॉवरेन रेटिंग (Sovereign Rating) के साथ संरेखित करता है।
हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। यदि सरकारी समर्थन कम होता है या भारत की सॉवरेन रेटिंग प्रभावित होती है, तो बैंक की IDR और गवर्नमेंट सपोर्ट रेटिंग (GSR) पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, यदि बैंक के रिस्क प्रोफाइल में कोई कमजोरी आती है, तो VR में भी गिरावट संभव है।
Peer comparison की बात करें तो, BOI की 'BBB-' की लॉन्ग-टर्म IDR और स्टेबल आउटलुक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक (Canara Bank) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) जैसे अन्य प्रमुख पब्लिक सेक्टर बैंकों के समान ही है। BOI की VR का 'bb' होना भी कई बड़े PSB के रेटिंग प्रोफाइल के अनुरूप है।
आगे निवेशकों को बैंक के ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट, उसकी लगातार बेहतर होती एसेट क्वालिटी, प्रॉफिटेबिलिटी और कैपिटलाइजेशन लेवल्स पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, लोन ग्रोथ (Loan Growth) को मैनेज करने की बैंक की क्षमता और सरकारी नीतियों (Government Policy) में किसी भी बदलाव पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।