बैंक ऑफ इंडिया के नतीजे
बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में अपने तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के नतीजे पेश किए हैं, जिसने बाजार को काफी प्रभावित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने Q4 FY26 में ₹3,016 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में 15% ज्यादा है। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए बैंक का कुल नेट प्रॉफिट ₹10,527 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 14% अधिक है।
असेट क्वालिटी में सुधार और डिविडेंड का ऐलान
नतीजों के साथ-साथ बैंक ने अपनी असेट क्वालिटी में भी सुधार दिखाया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) घटकर 1.98% रह गए, जो पिछले साल 3.27% थे। निवेशकों के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि बैंक के बोर्ड ने ₹4.65 प्रति शेयर के डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश की है। बैंक के कुल बिजनेस में 14.57% की साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई है, जो ₹16.98 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह ग्रोथ डिपॉजिट्स में 13.56% और एडवांसेज (Advances) में 15.82% की बढ़ोतरी से प्रेरित है।
पब्लिक सेक्टर बैंकों से तुलना
बैंक ऑफ इंडिया का प्रदर्शन दमदार रहा है, लेकिन जब इसकी तुलना अन्य पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) से की जाती है, तो कुछ अंतर दिखते हैं। FY26 में बैंक ऑफ इंडिया का नेट प्रॉफिट ₹10,527 करोड़ रहा। वहीं, सबसे बड़े PSB, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने FY26 के लिए रिकॉर्ड ₹80,032 करोड़ का मुनाफा कमाया। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने FY26 में ₹16,904 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।
मार्जिन पर दबाव और वैल्यूएशन
बैंक ऑफ इंडिया का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) - जो लोन पर मिलने वाले ब्याज और डिपॉजिट पर दिए जाने वाले ब्याज के बीच का अंतर होता है - FY26 के लिए घरेलू स्तर पर 2.78% रहा। वहीं, SBI का घरेलू NIM Q4 FY26 में 2.93% था। PNB का घरेलू NIM पिछले साल के 2.96% से घटकर Q4 FY26 में 2.61% हो गया था। बैंकिंग सेक्टर फिलहाल डिपॉजिट जुटाने की कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, जिससे NIM पर 10-15 बेसिस पॉइंट तक का दबाव आ सकता है।
वैल्यूएशन के लिहाज से बैंक ऑफ इंडिया आकर्षक दिख रहा है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 6.00-7.91x है, जो SBI के 11.2x और इंडस्ट्री एवरेज 16.67x से काफी कम है। इसी तरह, इसका प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो 0.9x है, जो SBI के 1.99x से भी नीचे है। इन अच्छे मेट्रिक्स के बावजूद, एनालिस्ट्स का बैंक ऑफ इंडिया पर 'न्यूट्रल' कंसेंसस है, जिसका मतलब है कि वे फिलहाल इसे न तो खरीदने लायक मानते हैं और न ही बेचने लायक। उनका औसत 12 महीने का प्राइस टारगेट ₹157.60 है, जो मौजूदा कीमत से लगभग 28% की बढ़ोतरी का संकेत देता है।
आगे की चुनौतियां
मजबूत नतीजों और बेहतर असेट क्वालिटी के बावजूद, आगे कुछ चुनौतियां भी हैं। भारतीय बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव हो रहे हैं, खासकर लोगों की बचत की आदतों में। इसका मतलब है कि बैंक डिपॉजिट जुटाने के लिए और ज्यादा प्रतिस्पर्धा करेंगे। इससे फंड की लागत बढ़ेगी और सभी बैंकों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। एनालिस्ट्स का 'न्यूट्रल' व्यू भी इसी ओर इशारा करता है। SBI जैसे बड़े बैंकों को उनके स्केल, व्यापक ऑफरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण अधिक वैल्यूएशन मिलता है। बैंक ऑफ इंडिया का कम P/E रेश्यो शायद इस बात का संकेत है कि बाजार भविष्य में ग्रोथ को लेकर थोड़ी धीमी उम्मीदें रख रहा है।
