Bank of India ने FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम के जरिए लगभग **$2.33 बिलियन** (करीब **₹20,000 करोड़**) जुटाए हैं। इस कदम का मकसद महंगे घरेलू डिपॉजिट्स को बदलकर बैंक के पास लिक्विडिटी और फंडिंग को मजबूत करना है।
फंडिंग को किया गया डाइवर्सिफाई
Bank of India ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए यह बड़ी रणनीति अपनाई है। बैंक का लक्ष्य महंगे डोमेस्टिक बल्क डिपॉजिट्स की जगह अब फॉरेन करेंसी फंडिंग को प्राथमिकता देना है। इस फंड से बैंक अपनी लेंडिंग ऑपरेशन्स को कम से कम एक तिमाही तक आसानी से मैनेज कर पाएगा।
क्रेडिट ग्रोथ और आरबीआई का रोल
बैंक ने साफ कर दिया है कि सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी (करीब ₹10.43 लाख करोड़) होने के बावजूद, वे अपनी 15% से 17% की एनुअल क्रेडिट ग्रोथ के टारगेट पर कायम रहेंगे। इस फंड जुटाने की प्रक्रिया में Reserve Bank of India की स्पेशल कंसेशनल स्वैप विंडो ने बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे हेजिंग की लागत (Hedging Costs) को काफी हद तक कम करने में मदद मिली है।
रिस्क और आगे की राह
निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि फॉरेन करेंसी में फंड जुटाने के साथ 'करेंसी रिस्क' भी जुड़ा होता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो बैंक पर ब्याज चुकाने का बोझ बढ़ सकता है। बैंक का अगला फोकस दिसंबर 2026 तक $1 बिलियन का अतिरिक्त फंड Overseas Foreign Currency Borrowings (OFCB) के जरिए जुटाने पर है। अब देखना यह होगा कि क्या यह सस्ता फंड बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन को सुरक्षित रख पाता है या नहीं।
