RBI द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद Bank of India ने अपने रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट (RBLR) में **25 बेसिस पॉइंट्स** का इजाफा किया है। नई दरें **7 अक्टूबर, 2026** से प्रभावी हो गई हैं, जिससे फ्लोटिंग-रेट लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI बढ़ना तय है।
ब्याज दरों में इजाफे का गणित
Bank of India ने अपने बेंचमार्क RBLR को पुराने 8.10% से बढ़ाकर 8.35% कर दिया है। यह कदम Reserve Bank of India (RBI) द्वारा रेपो रेट को बढ़ाकर 5.50% करने के ठीक बाद उठाया गया है। बैंक का नया बेंचमार्क 5.50% रेपो रेट और 2.85% के फिक्स्ड मार्क-अप को मिलाकर तैयार किया गया है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
जिन ग्राहकों ने फ्लोटिंग-रेट पर लोन ले रखा है, उन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जैसे ही लेंडिंग रेट ऊपर जाता है, बैंक आपकी मंथली किस्तों यानी EMI को री-कैलकुलेट करते हैं। इसका मतलब यह है कि या तो आपकी EMI बढ़ जाएगी या फिर बैंक आपके लोन के टेन्योर (अवधि) को लंबा कर देगा ताकि बढ़ा हुआ ब्याज कवर हो सके। जिन लोगों का लोन सीधे एक्सटर्नल रेपो बेंचमार्क से जुड़ा है, उन्हें सबसे पहले इसका असर देखने को मिलेगा।
बैंक की रणनीति और रिस्क
बैंकों के लिए दरों में इस तरह का बदलाव अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन को सुरक्षित रखने का एक तरीका होता है। हालांकि, यह कदम जोखिम भी लाता है। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो यह क्रेडिट डिमांड को धीमा कर सकता है और मौजूदा कर्जदारों की भुगतान क्षमता पर दबाव डाल सकता है, जिसका असर भविष्य में बैंक की एसेट क्वालिटी पर भी पड़ सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि बढ़ती दरों के बीच बैंक डिपॉजिट जुटाने और लोन डिमांड को बनाए रखने में कितना सफल होता है।
