Bank of India ने सितंबर तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल **18.68%** बढ़कर **₹3,202 करोड़** हो गया है, जिसे **19%** की नेट इंटरेस्ट इनकम ग्रोथ का सहारा मिला है।
Bank of India ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में दमदार प्रदर्शन किया है। बैंक का नेट प्रॉफिट करीब 19% बढ़कर ₹3,202 करोड़ रहा। इस तेजी की मुख्य वजह ग्लोबल नेट इंटरेस्ट इनकम में 19% का उछाल रही, जो कि इस तिमाही में ₹7,007 करोड़ दर्ज की गई। हालांकि, लोन पर इंटरेस्ट इनकम 20% बढ़ी, लेकिन डिपॉजिट्स पर ब्याज के बढ़ते खर्च के चलते इंटरेस्ट एक्सपेंस में भी 14% का इजाफा देखने को मिला।
एसेट क्वालिटी और लोन बुक
बैंक की एसेट क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है। ग्रॉस NPA रेशियो जो पिछले साल 2.54% था, वह घटकर अब 1.60% पर आ गया है। ग्रॉस बैड लोन की वैल्यू भी घटकर ₹13,648 करोड़ रह गई है। हालांकि, निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि ताजी लोन फिसलन (Fresh Slippages) ₹1,201 करोड़ रही, जिसमें एग्रीकल्चर और MSME सेक्टर का हिस्सा सबसे ज्यादा है।
ग्रोथ और डिपॉजिट के ट्रेंड्स
बैंक की क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी हुई है और डोमेस्टिक एडवांसेस 18% बढ़कर ₹7.04 लाख करोड़ पर पहुंच गए हैं। बैंक का मुख्य फोकस RAM (रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME) सेगमेंट पर है, जो अब कुल डोमेस्टिक एडवांसेस का 58% से ज्यादा है। मोटगेज लेंडिंग में 33% की शानदार ग्रोथ देखी गई। डिपॉजिट का आंकड़ा ₹10.38 लाख करोड़ रहा, लेकिन CASA रेशियो गिरकर 34.16% पर आ गया है, क्योंकि ग्राहक अब सेविंग्स अकाउंट के बजाय टर्म डिपॉजिट्स में पैसा शिफ्ट कर रहे हैं।
मार्जिन और भविष्य की राह
बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2.47% रहा। यह सालाना आधार पर तो बेहतर है, लेकिन जून तिमाही के 2.52% से थोड़ा कम है, जो डिपॉजिट कॉस्ट के दबाव को दर्शाता है। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 17.78% पर मजबूत बना हुआ है। अब बाजार की नजर इस पर होगी कि बैंक एग्रीकल्चर और MSME पोर्टफोलियो में आने वाले रिस्क को कैसे मैनेज करता है और मार्जिन्स को स्टेबल रखने के लिए क्या कदम उठाता है।
