बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) अपने विदेशी मुद्रा डिपॉजिट्स (Foreign Currency Deposits) को बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों से **$1 बिलियन** यानी करीब **₹8,300 करोड़** जुटाने की तैयारी में है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब बैंक को FCNR-B डिपॉजिट्स में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। हालांकि, इस खबर के बाद **10 अगस्त, 2026** को बैंक के शेयरों में करीब **2.5%** की गिरावट दर्ज की गई।
क्यों उठा रही है ₹8,300 करोड़?
बैंक ऑफ इंडिया ने आधिकारिक तौर पर मीडियम-टर्म नोट (MTN) प्रोग्राम के तहत $1 बिलियन तक की राशि जुटाने की योजना का ऐलान किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट-बैंक (FCNR-B) डिपॉजिट्स में इजाफा करना है। इस फंड जुटाने की प्रक्रिया की संरचना पर चर्चा और मंजूरी के लिए बैंक के निदेशक मंडल (Board of Directors) की बैठक 14 अगस्त, 2026 को होनी तय है।
इस कवायद के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा दी गई एक विशेष रियायती स्वैप विंडो (Concessional Swap Window) का फायदा उठाना है। यह विंडो बैंकों को विदेशी मुद्रा के इनफ्लो को रुपये में बदलने की अनुमति देती है, वह भी एक विशेष और कम लागत वाली दर पर। इससे बैंकों के लिए नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) डिपॉजिटर्स को आकर्षक ब्याज दरें देना आसान हो जाता है। बैंक ने पहले ही इस मोर्चे पर अच्छी शुरुआत की है, 5 जून से 30 जुलाई, 2026 के बीच $207.46 मिलियन FCNR-B डिपॉजिट्स जुटाए हैं।
योजना का विवरण
यह फंड जुटाने का काम गुजरात के गिफ्ट सिटी (GIFT City) स्थित बैंक की शाखा के माध्यम से किया जाएगा। इस योजना में तीन से पांच साल की अवधि वाले USD-denominated बॉन्ड जारी किए जाएंगे। बैंक इस फंड जुटाने की प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा करने का इरादा रखता है, जिसकी समय-सीमा 31 दिसंबर, 2026 तक चलेगी। 10 अगस्त, 2026 को इस योजना की घोषणा के बाद, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर बैंक ऑफ इंडिया के शेयर लगभग 2.5% गिरकर ₹141.39 पर बंद हुए।
पिछली कोशिशें और आगे की राह
यह फैसला बैंक की पिछली फंड जुटाने की कोशिशों के बाद आया है। दिसंबर 2025 में, बैंक ऑफ इंडिया ने टियर II बॉन्ड के जरिए ₹2,500 करोड़ और लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड के जरिए ₹10,000 करोड़ जुटाए थे। ये नियमित फंड जुटाने के प्रयास बैंक की बैलेंस शीट को मजबूत करने और अपनी लंबी अवधि की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
निवेशकों को इस $1 बिलियन जुटाने की प्रक्रिया के विशिष्ट समय और निष्पादन पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि RBI की रियायती स्वैप विंडो 16 अक्टूबर, 2026 को समाप्त हो रही है। चूंकि बैंक आकर्षक दरें देने के लिए इस अस्थायी विंडो पर निर्भर है, इसलिए डिपॉजिट ग्रोथ की स्थिरता इस बात पर निर्भर कर सकती है कि बैंक इस सुविधा के बंद होने से पहले फंड जुटाने में कितना सफल होता है। इसके अतिरिक्त, बैंक को $1 बिलियन के लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश में विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव से जुड़े संभावित जोखिमों का प्रबंधन भी करना होगा।
