Bank of India ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही के लिए अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को **2.55%** तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। बढ़ती ब्याज दरों के बीच बैंक के लिए लोन की कमाई बढ़ रही है, हालांकि डिपॉजिट की लागत को संभालना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा, निवेशकों की नजर बैंक की **₹65,000 करोड़** की लोन पाइपलाइन पर भी टिकी है।
मुनाफे की बढ़ती रफ्तार
बैंक का लक्ष्य अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन को सितंबर तिमाही के 2.47% से बढ़ाकर 2.55% तक पहुँचाना है। इस उम्मीद के पीछे सबसे बड़ा हाथ Reserve Bank of India द्वारा रेपो रेट में की गई बढ़ोतरी का है। बैंक का करीब 66% लोन पोर्टफोलियो एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट से जुड़ा है, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फायदा बैंक को तुरंत मिल रहा है।
चुनौती: क्या बढ़ेगी डिपॉजिट की लागत?
बैंक के लिए सबसे बड़ा रिस्क डिपॉजिट की लागत है। मैनेजमेंट के मुताबिक, मौजूदा टर्म डिपॉजिट का करीब 60% हिस्सा 12 से 18 महीने की मैच्योरिटी वाले बकेट में है। इसका मतलब यह है कि जैसे-जैसे ये डिपॉजिट मैच्योर होंगे, बैंक को उन्हें ऊंची दरों पर रिन्यू करना पड़ेगा, जिससे कॉस्ट ऑफ फंड्स में धीरे-धीरे इजाफा हो सकता है।
इंटरनेशनल और डोमेस्टिक ऑपरेशन का अंतर
बैंक के कुल लोन बुक में इंटरनेशनल ऑपरेशंस की हिस्सेदारी 15% है। डोमेस्टिक ऑपरेशंस का प्रदर्शन काफी मजबूत है जहां मार्जिन 2.70% से ऊपर है, जबकि इंटरनेशनल ऑपरेशंस में यह करीब 1.14% के आसपास है। बैंक अपनी 15 देशों की पहुंच का उपयोग करके इन दोनों सेगमेंट में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भविष्य की योजना और ग्रोथ
बैंक के पास 30 सितंबर तक ₹65,000 करोड़ की मजबूत लोन पाइपलाइन है। इसमें पावर सेक्टर के ₹10,000 करोड़, रोड प्रोजेक्ट्स के ₹5,600 करोड़ और ऑयल एंड गैस सेक्टर के ₹4,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। मैन्युफैक्चरिंग, सीमेंट और शिपबिल्डिंग सेक्टर भी बैंक की भविष्य की ग्रोथ का अहम हिस्सा हैं। एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी राहत है, क्योंकि बैंक की स्लिपेज में कमी देखी गई है, जो बेहतर लोन रिकवरी का संकेत है।
