Bank of India, Bank of Baroda: बड़े सरकारी बैंकों के CEO को मिला 3 साल का एक्सटेंशन, स्थिरता पर जोर

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Bank of India, Bank of Baroda: बड़े सरकारी बैंकों के CEO को मिला 3 साल का एक्सटेंशन, स्थिरता पर जोर
Overview

सरकार ने बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) रजनीश कर्नाटक और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के MD देवदत्त चंद के कार्यकाल को तीन-तीन साल के लिए बढ़ा दिया है। इस फैसले से इन बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों में लीडरशिप की स्थिरता सुनिश्चित होगी, जो कि UCO Bank की MD के एक्सटेंशन को लेकर चल रही अनिश्चितता के बिलकुल विपरीत है। पब्लिक बैंकिंग सेक्टर, जिसका औसत P/E **8.04** है, इस स्थिरता को आगे भी क्रेडिट ग्रोथ जारी रहने के अनुमानों के बीच रणनीतिक योजना को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

प्रमुख सरकारी बैंकों के CEO को मिला 3 साल का एक्सटेंशन

केंद्र सरकार ने बैंक ऑफ इंडिया (BoI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के मैनेजिंग डायरेक्टर्स (MD) के कार्यकाल को अगले तीन सालों के लिए बढ़ा दिया है। रजनीश कर्नाटक 29 अप्रैल 2026 से बैंक ऑफ इंडिया के MD और CEO बने रहेंगे, जबकि देवदत्त चंद का बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यकाल 1 जुलाई 2026 से आगे बढ़ाया गया है। यह निर्णय इन प्रमुख पब्लिक सेक्टर बैंकों में नेतृत्व की स्थिरता बनाए रखने पर सरकार के जोर को दिखाता है, जिसका मकसद दीर्घकालिक लक्ष्यों को लगातार हासिल करना है।

स्थिरता के बीच मजबूत दिख रहा बैंकिंग सेक्टर

यह एक्सटेंशन ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैंकिंग सेक्टर अपनी मजबूती दिखा रहा है। हालिया सर्वे के अनुसार, मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर आर्थिक गतिविधियों के समर्थन से 2026 की शुरुआत में नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 11-13% रहने का अनुमान है। सरकारी बैंकों के प्रदर्शन का अहम सूचक Nifty PSU Bank इंडेक्स पिछले एक साल में लगभग 84.66% बढ़ा है। यह बेहतर एसेट क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी को दर्शाता है। BoI, जिसका P/E 7.19 पर ट्रेड कर रहा है, और BoB, जिसका P/E करीब 7.52 है, सेक्टर के औसत P/E 8.04 से नीचे वैल्यू किए जा रहे हैं। पिछले साल BoI के शेयर में 29.78% की तेजी आई थी, जबकि BoB का हालिया प्रदर्शन मिला-जुला रहा है।

UCO Bank लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता में

इसके विपरीत, UCO Bank में लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सरकार ने अभी तक उसके MD और CEO अश्विनी कुमार के एक्सटेंशन पर कोई फैसला नहीं लिया है, जिनका कार्यकाल 1 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इस स्पष्टता की कमी से UCO Bank की रणनीतिक योजना और ऑपरेशंस के लिए अल्पावधि में चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। UCO Bank 12.75 के P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो BoI और BoB से अधिक है, और पिछले साल इसके शेयर में 15.15% की गिरावट आई थी।

विश्लेषकों की राय और वैल्यूएशन

विश्लेषकों का कहना है कि BoI और BoB में बढ़ी हुई लीडरशिप को लेकर वे सतर्कता से सकारात्मक हैं। BoI के लिए एक न्यूट्रल कंसेंसस रेटिंग है, जिसमें प्राइस टारगेट 3.06% की मामूली अपसाइड का संकेत दे रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए एक मॉडरेट 'बाय' कंसेंसस है, जिसमें विश्लेषकों का अनुमान लगभग 15.12% अपसाइड और औसत प्राइस टारगेट ₹327.00 है। MarketsMOJO ने हाल ही में BoB के वैल्यूएशन को 'बहुत आकर्षक' रेटिंग दी है, हालांकि 'होल्ड' रेटिंग के साथ, और SBI जैसे साथियों की तुलना में इसकी अफोर्डेबिलिटी पर ध्यान दिया है। MarketsMOJO ने BoI को भी 'बाय' रेटिंग दी है, जो इसके आकर्षक वैल्यूएशन और मजबूत फंडामेंटल्स, जैसे कि 2.26% का लो ग्रॉस NPA रेशियो, का हवाला देते हुए कहा है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.