Bank of England (BoE) ने अपनी बेस इंटरेस्ट रेट में **0.25%** की बढ़ोतरी कर इसे **4.00%** कर दिया है। **8-1** के बहुमत से आए इस फैसले के पीछे मुख्य वजह बढ़ती महंगाई और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें हैं।
फैसले के पीछे की असली वजह
Bank of England की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने यह सख्त कदम महंगाई को काबू में करने के लिए उठाया है। बैंक का अनुमान है कि महंगाई 2027 के मध्य तक 5% के करीब रह सकती है। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान-मिडिल ईस्ट संकट के कारण सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतें और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें हैं। कमिटी में कैथरीन मान ने 50 बेसिस पॉइंट की और भी बड़ी बढ़ोतरी का सुझाव दिया था, जो दर्शाता है कि नीति निर्माता कीमतों के तेजी से बढ़ने को लेकर काफी सतर्क हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इस फैसले का असर भारत के कई सेक्टरों पर पड़ सकता है:
- IT सेक्टर पर दबाव: भारत की कई दिग्गज IT कंपनियां यूके (UK) से बड़ा रेवेन्यू हासिल करती हैं। वहां ब्याज दरें बढ़ने से क्लाइंट्स अपना बजट टाइट कर सकते हैं, जिससे सॉफ्टवेयर और कंसल्टिंग प्रोजेक्ट्स में देरी की संभावना है।
- FII सेंटीमेंट: विकसित देशों में जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो ग्लोबल निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर भागते हैं। इससे उभरते बाजारों जैसे भारत में लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है और घरेलू बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
- करेंसी में हलचल: इस कदम का असर ब्रिटिश पाउंड और भारतीय रुपये की चाल पर भी पड़ेगा, जिससे उन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं जिनका यूके के साथ ज्यादा ट्रेड लिंक है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह ब्याज दरों का पीक (Peak) है या 2027 की शुरुआत में इसमें और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े और MPC के बयान ही मार्केट की दिशा तय करेंगे।
