लोन ग्रोथ का बड़ा प्लान, पर मार्जिन पर पड़ रहा असर!
बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) एक तरफ जहां बैंकिंग सेक्टर में धीमी क्रेडिट ग्रोथ और डिपॉजिट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीदों के बीच आक्रामक लोन ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उसे अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को 2.75% से 2.95% के बीच बनाए रखने के लिए रणनीति बनानी पड़ रही है। बैंक का फोकस लोन यील्ड को ऑप्टिमाइज़ करने और ट्रेडिशनल डिपॉजिट के अलावा अन्य स्रोतों से फंड जुटाने पर है।
₹50,000 करोड़ की पाइपलाइन तैयार
FY27 तक कॉर्पोरेट लोन बुक को 10% बढ़ाने के लक्ष्य के साथ, बैंक के पास ₹50,000 करोड़ की मजबूत पाइपलाइन है, जिसमें ज्यादातर टर्म लोन शामिल हैं। इससे पता चलता है कि रिन्यूएबल पावर, स्टील और सीमेंट जैसे सेक्टरों में निवेश और विस्तार के लिए बिज़नेस की अच्छी खासी मांग है। बैंक के शेयर फिलहाल करीब ₹263.90 पर ट्रेड कर रहे हैं, जिनकी मार्केट वैल्यू लगभग ₹1.36 ट्रिलियन है। बैंक का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 6.4x से 7.0x के बीच है, जो इसे पीयर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के 11.05x P/E के मुकाबले वैल्यू स्टॉक बनाता है।
मार्जिन पर बढ़ता दबाव
पूरे बैंकिंग सेक्टर में FY27 के लिए क्रेडिट ग्रोथ 12-13% रहने की उम्मीद है, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ 10-12% तक सीमित रहने का अनुमान है। ऐसे में फंड की कमी हो सकती है। बैंक ऑफ बड़ौदा का क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो पहले से ही 81% से 83% के बीच काफी हाई है। सिस्टम-वाइड CD रेशियो 85% के करीब पहुंचने के साथ, डिपॉजिट के लिए प्रतिस्पर्धा बहुत तेज है, जिससे बैंकों को ऊंची ब्याज दरें देनी पड़ रही हैं और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) सिकुड़ रहे हैं। बैंक का FY27 के लिए 2.75% - 2.95% का लक्ष्य मार्जिन पर इस दबाव को मैनेज करने की उसकी रणनीति को दिखाता है।
मुख्य जोखिम और चुनौतियाँ
शानदार प्रॉफिट के बावजूद, बैंक ऑफ बड़ौदा को मुख्य रूप से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण बढ़ती डिपॉजिट लागत से काफी मार्जिन प्रेशर का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या उसके हाई क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो से और भी गंभीर हो जाती है। एक बड़ा जोखिम टेलीकॉम सेक्टर में है, खासकर वोडाफोन आइडिया (Vi) से जुड़ा हुआ। हालांकि Vi के रिवाइवल के लिए नए लोन दिए जा सकते हैं, लेकिन उसकी कमजोर वित्तीय स्थिति और भारी कर्ज उधारदाताओं के लिए जोखिम पैदा करते हैं। मॉर्गन स्टैनली ने Vi को 'Underweight' रेटिंग दी है और ₹225 का टारगेट प्राइस रखा है। इसके अलावा, एक्स्पेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क को अपनाने से अनपेक्षित प्रोविजनिंग की जरूरत पड़ सकती है।
एनालिस्ट्स की राय और कैपिटल प्लान
एनालिस्ट्स आम तौर पर 'Moderate Buy' की राय दे रहे हैं, जिसमें अगले 12 महीनों में 20% तक के अपसाइड पोटेंशियल का अनुमान है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्मों के बीच राय अलग-अलग है। कुछ 'Buy' रेटिंग बरकरार रखे हुए हैं, जबकि मैक्वायर और मॉर्गन स्टैनली जैसी फर्म मार्जिन स्थिरता और शॉर्ट-टर्म जोखिमों को लेकर सतर्क हैं और 'Neutral' या 'Underweight' रेटिंग की सलाह दे रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा अपनी कैपिटल बेस को मजबूत करने की भी योजना बना रहा है, जिसमें FY28 तक लगभग ₹8,500 करोड़ की इक्विटी जुटाना और बॉन्ड के जरिए ₹6,000 करोड़ तक फंड जुटाना शामिल है।
