बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के लिए जून तिमाही के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। एक बड़े लीगल सेटलमेंट के कारण बैंक के नेट प्रॉफिट में 72% की भारी गिरावट आई है, जो कि **₹1,278 करोड़** रहा। यह गिरावट मुख्य रूप से **₹5,680 करोड़** के एकमुश्त सेटलमेंट चार्ज की वजह से है। हालांकि, बैंक के मुख्य व्यवसाय ने अच्छी पकड़ बनाए रखी है, क्योंकि नेट इंटरेस्ट इनकम में **9.5%** की बढ़ोतरी हुई है।
Detailed Coverage
NMC ग्रुप सेटलमेंट का असर
बैंक ऑफ बड़ौदा ने 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए 72% की गिरावट के साथ नेट प्रॉफिट की घोषणा की है। बैंक का लाभ ₹1,278 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह ₹4,541 करोड़ था। इस भारी गिरावट का मुख्य कारण NMC ग्रुप से संबंधित एक लंबे कानूनी विवाद के निपटारे के बाद ₹5,680 करोड़ का एक असाधारण चार्ज (Exceptional Charge) है।
यह सेटलमेंट 1 जुलाई, 2026 को अंतिम रूप दिया गया था और इसने अबू धाबी व इंग्लैंड में NMC ग्रुप के पतन से संबंधित मुकदमों का समाधान कर दिया है। कंपनी की दिवालियापन उसके पूर्व शेयरधारकों और प्रबंधन द्वारा 2012 से 2020 तक किए गए कथित धोखाधड़ी से जुड़ी थी। लगभग $600 मिलियन, या ₹5,680 करोड़ का भुगतान करके, बैंक ने इस अध्याय को बंद कर दिया है, जिससे एक बड़ी अनिश्चितता समाप्त हो गई है जो वर्षों से उसके बैलेंस शीट पर भारी पड़ रही थी।
कोर बैंकिंग मजबूत
कानूनी सेटलमेंट के प्रभाव के बावजूद, बैंक के मुख्य बैंकिंग संचालन (Core Banking Operations) में स्थिरता दिखी। नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income), जो लोन पर अर्जित ब्याज और जमा पर दिए गए ब्याज के बीच का अंतर मापता है, 9.5% बढ़कर ₹12,524 करोड़ हो गया। यह प्रदर्शन बताता है कि बैंक की मुख्य उधार और जमा जुटाने की गतिविधियां लगातार मांग देख रही हैं। बैंक ने ₹8,127 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी दर्ज किया, जो कि पिछले साल की इसी तिमाही के ₹8,236 करोड़ के मुकाबले लगभग समान है (असाधारण कानूनी प्रावधान के प्रभाव को छोड़कर)।
एसेट क्वालिटी और ग्रोथ
एसेट क्वालिटी (Asset Quality) के आंकड़ों में पिछली तिमाही की तुलना में थोड़ी बढ़ोतरी दिखी। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो, जो कुल लोन का वह प्रतिशत है जो बकाया है, 1.89% से बढ़कर 1.99% हो गया। इसी तरह, नेट एनपीए (Net NPA) रेशियो 0.45% से बढ़कर 0.50% हो गया। हालांकि, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में, बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, क्योंकि तब GNPA 2.28% और नेट NPA 0.60% था। बैंक ने अपनी ग्रोथ भी बनाए रखी, कुल डिपॉजिट 13.8% बढ़कर ₹16.34 लाख करोड़ हो गई और ग्लोबल एडवांसेस (Global Advances) 17.4% बढ़कर ₹14.17 लाख करोड़ हो गया।
फंड जुटाने की सीमा का विस्तार
भविष्य की ग्रोथ और अंतर्राष्ट्रीय संचालन का समर्थन करने के लिए, बैंक के बोर्ड ने अपनी विदेशी उधार क्षमताओं (Overseas Borrowing Capabilities) को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। बैंक अपना $4 बिलियन का मीडियम टर्म नोट (MTN) प्रोग्राम बनाए रखेगा और ग्रीन व ईएसजी बॉन्ड जारी करने के लिए $1 बिलियन की एक सब-लिमिट भी पेश करेगा। इसके अतिरिक्त, विदेशी सिंडिकेटेड और द्विपक्षीय ऋण सुविधाओं (Syndicated and Bilateral Loan Facilities) की सीमा दोगुनी करके $10 बिलियन कर दी गई है। निवेशक भविष्य की क्रेडिट मांग को पूरा करने और आने वाली तिमाहियों में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए इन बढ़ी हुई सीमाओं के उपयोग पर नज़र रख सकते हैं।
