Bank of Baroda: टॉप पर बने रहने के लिए नई तकनीक पर दांव, जानिए क्या हैं प्लान्स

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Bank of Baroda: टॉप पर बने रहने के लिए नई तकनीक पर दांव, जानिए क्या हैं प्लान्स
Overview

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) अपने 'bob World' ऐप को बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और IoT-इनेबल्ड UPI पेमेंट्स से और बेहतर बना रहा है। इन अपग्रेड्स का मकसद डिजिटल सर्विस को मॉडर्न बनाना, यूजर एक्सपीरियंस और सिक्योरिटी बढ़ाना है। हालांकि, बैंक को प्राइवेट सेक्टर के कड़े मुकाबले और एक बड़े टैक्स डिमांड का भी सामना करना पड़ रहा है। यह कदम UPI प्रोसेसर के तौर पर अपनी लीडिंग पोजीशन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।

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डिजिटल क्रांति: सेवाओं को मॉडर्न बनाने की पहल

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) अपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की रफ्तार तेज कर रहा है। बैंक अपने 'bob World' ऐप में एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) क्षमताओं को इंटीग्रेट कर रहा है। अब बैंक ₹5,000 तक के ट्रांजैक्शन्स के लिए OS-नेटिव बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की सुविधा दे रहा है, जिससे UPI पेमेंट्स और स्मूथ हो जाएंगे। इसके अलावा, आधार-बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन से PIN रीसेट की सुविधा भी शुरू की गई है। इससे फिजिकल डेबिट कार्ड की जरूरत कम हो जाती है और मोबाइल-फर्स्ट यूजर्स की पसंद का भी ध्यान रखा गया है। ये अपडेट पब्लिक सेक्टर के बैंकों की एक बड़ी स्ट्रैटेजी का हिस्सा हैं, जो तेजी से बढ़ते प्राइवेट बैंकों के सामने इनोवेट और कॉम्पिटिटिव बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।

मार्केट में पोजीशन और कॉम्पिटिशन

UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के मामले में तीसरे सबसे बड़े बैंक होने के बावजूद, बैंक ऑफ बड़ौदा एक ऐसे मार्केट में ऑपरेट करता है जहां प्राइवेट बैंकों और PhonePe व Google Pay जैसी बड़ी फिनटेक फर्म्स का दबदबा है। बैंक भले ही 1 अरब से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन्स को हैंडल करता हो, लेकिन इसका डिजिटल इकोसिस्टम लीडिंग कंपटीटर्स जितना इंटीग्रेटेड नहीं है। बैंक का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो, जो 6.5 से 7.1 के बीच है, यह दर्शाता है कि इन्वेस्टर्स इसे एक वैल्यू स्टॉक के तौर पर देख रहे हैं, खासकर दूसरे बैंकों के हाई मल्टीपल्स की तुलना में। मर्चेंट्स के लिए बेहद कम ट्रांजैक्शन फीस वाले माहौल में नए रेवेन्यू सोर्स खोजने के लिए IoT-बेस्ड पेमेंट्स का अडॉप्शन एक एक्सपेरिमेंट भी है।

निवेशकों की चिंताएं

इन्वेस्टर्स बैंक की टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट पर स्ट्रक्चरल इश्यूज के हावी होने को लेकर सतर्क हैं। मार्च 2026 में, बैंक ऑफ बड़ौदा को असेसमेंट ईयर 2020-21 के लिए ₹800 करोड़ से ज्यादा की इनकम टैक्स डिमांड नोटिस मिला था, जिसे बैंक चैलेंज करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, बैंक लंबे समय से कॉर्पोरेट डिफॉल्टर्स से बड़े लोन की रिकवरी के लिए संघर्ष कर रहा है। अपने प्राइवेट सेक्टर के समकक्षों के विपरीत, जो अक्सर ज्यादा फी इनकम जेनरेट करते हैं और तेज कस्टमर सर्विस देते हैं, बैंक ऑफ बड़ौदा की डिजिटल कस्टमर सपोर्ट स्पीड पर सवाल उठते रहे हैं। UPI में मार्केट कंसंट्रेशन पर रेगुलेटरी स्क्रूटनी से ऑपरेशनल लिमिट्स भी लग सकती हैं, जो बैंक के ट्रांजैक्शन वॉल्यूम ग्रोथ को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर जब वह अपनी डिजिटल पेशकशों का विस्तार कर रहा है।

आगे की राह

एनालिस्ट बैंक ऑफ बड़ौदा की टियर 1 और टियर 2 बॉन्ड्स के जरिए कैपिटल रेज करने की योजनाओं पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। ये प्रयास बैंक के फाइनेंशियल बेस को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर मौजूदा टैक्स और रेगुलेटरी अनिश्चितताओं को देखते हुए। हालांकि नए बायोमेट्रिक और IoT फीचर्स बैंक के मोबाइल प्लेटफॉर्म को बेहतर बनाते हैं, लेकिन इसका लॉन्ग-टर्म वैल्यूएशन इसके एसेट क्वालिटी इश्यूज को सुलझाने और तेजी से बढ़ते प्राइवेट सेक्टर कंपटीटर्स के मुकाबले अपनी मार्केट शेयर को प्रभावी ढंग से डिफेंड करने पर ज्यादा निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.