मार्जिन पर दबाव से कैसे निपट रहा है बैंक?
बैंक के CEO देबाशीष चंद (Debadatta Chand) के अनुसार, मौजूदा समय में बैंकिंग सेक्टर पर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को लेकर काफी दबाव है। इस चुनौती से निपटने के लिए बैंक ने अपनी टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने और खास कॉरपोरेट सेगमेंट में ग्रोथ पर फोकस करने की रणनीति अपनाई है।
टेक्नोलॉजी में भारी निवेश और नए ग्रोथ सेक्टर
बैंक ऑफ बड़ौदा अपने टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 250 से अधिक नए पेशेवरों को हायर करेगा। साथ ही, अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट का 10% से 15% हिस्सा टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है। इसमें साइबर सिक्योरिटी और कस्टमर सर्विस को और बेहतर बनाना शामिल है। इसके लिए BarodaSun Technologies (BSTL) कंपनी में अहम भूमिका निभाएगी।
कॉर्पोरेट लेंडिंग (corporate lending) में बैंक अब पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) के बजाय रिन्यूएबल्स, डेटा सेंटर्स और R&D जैसे हाई-ग्रोथ वाले सेक्टरों को प्राथमिकता दे रहा है। इन सेक्टरों में ग्रोथ की ज्यादा संभावनाएं हैं। बैंक का कॉरपोरेट लोन पाइपलाइन (loan pipeline) लगभग ₹50,000 करोड़ का है, जिसमें से ₹25,000 करोड़ सैंक्शन (sanctioned) हो चुके हैं और बाकी ₹25,000 करोड़ अभी प्रोसेस में हैं।
लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, बैंक का शेयर ₹263-₹266 के बीच ट्रेड कर रहा है। कंपनी ने इस तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं, लेकिन शेयर अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर से नीचे है, जो निवेशकों के सतर्क रुख का संकेत देता है।
साथियों की तुलना और मार्जिन का गणित
CEO चंद ने कहा कि 3% का NIMs आज के दौर में एक 'लक्जरी' है। बैंक का लक्ष्य NIMs को 2.75%-2.95% के बीच रखना है, जबकि ग्लोबल बुक के लिए यह 1.25%-1.5% के आसपास है। ऐसे में, बैंक को अपना रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) 1% से ऊपर बनाए रखने के लिए नॉन-इंटरेस्ट इनकम (non-interest income) पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा।
अपने साथियों की तुलना में, बैंक ऑफ बड़ौदा का P/E रेशियो लगभग 7.0x-7.2x है, जो इसे वैल्यू स्टॉक बनाता है। वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का P/E 11.2x और HDFC Bank व ICICI Bank का P/E 15.8x-16.8x है। बैंक का मार्केट कैप लगभग ₹1.36 ट्रिलियन है, जबकि SBI का ₹9 ट्रिलियन और HDFC Bank का ₹12 ट्रिलियन से ज्यादा है।
हालांकि, विश्लेषकों (Analysts) को नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर बढ़ते दबाव की चिंता है, खासकर डिपॉजिट की बढ़ती लागत और 38.45% तक गिरे CASA रेशियो के कारण। मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) ने 'अंडरवेट' रेटिंग और ₹225 का टारगेट प्राइस दिया है। बैंक पर करीब ₹8,49,004 करोड़ की कंटीजेंट लायबिलिटी (contingent liabilities) भी एक अहम फैक्टर है।
भविष्य की राह और बैंक की रणनीति
बाजार के जानकारों की राय मिली-जुली है, लेकिन ज्यादातर 'बाय' या 'मॉडरेट बाय' रेटिंग दे रहे हैं। एनालिस्ट्स के औसत प्राइस टारगेट ₹310 से ₹333.76 तक हैं, जो 17%-23% तक की संभावित तेजी का संकेत देते हैं। वहीं, BofA Securities (टारगेट ₹280) और HSBC (टारगेट ₹230) जैसे कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने हाल ही में अपने टारगेट कम किए हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा का मैनेजमेंट फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए 12%-14% के लोन ग्रोथ का अनुमान लगा रहा है और ROA 1% से ऊपर बनाए रखने का लक्ष्य है। बैंक फाइनेंशियल ईयर 2028 (FY28) तक करीब ₹8,500 करोड़ की इक्विटी कैपिटल (equity capital) जुटाने पर भी विचार कर रहा है। कुल मिलाकर, बैंक मुश्किल मार्जिन वाले माहौल में रणनीतिक निवेशों और केंद्रित ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रहा है।
