Bank of America ने अपने ग्राहकों को आगाह किया है कि वे AI असिस्टेंट्स के साथ अपनी बैंकिंग आईडी और पासवर्ड शेयर न करें। बैंक ने साफ किया है कि ऐसी किसी भी टूल से होने वाले गलत ट्रांजेक्शन की जिम्मेदारी पूरी तरह से ग्राहक की होगी।
आजकल बजटिंग और शॉपिंग के लिए AI-बेस्ड असिस्टेंट्स का चलन बढ़ गया है, लेकिन बैंक ऑफ अमेरिका ने अपने ग्राहकों को सचेत किया है कि ये सुविधाएं आपके बैंक अकाउंट के लिए खतरा बन सकती हैं। बैंक ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि आप किसी थर्ड-पार्टी AI टूल को अपनी लॉगिन डिटेल्स देते हैं, तो यह डेटा लीक का एक बड़ा जरिया बन सकता है।
सुरक्षा और धोखाधड़ी का रिस्क
बैंक का कहना है कि अगर आप किसी अनधिकृत AI प्लेटफॉर्म के साथ अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करते हैं और वहां कोई डेटा ब्रीच होता है, तो आपकी सारी फाइनेंशियल जानकारी खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, यदि AI एजेंट आपके क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके अकाउंट में लॉगिन करता है, तो बैंक के सिक्योरिटी सिस्टम इसे 'फ्रॉड' मान सकते हैं, जिसके चलते आपका अकाउंट तुरंत ब्लॉक किया जा सकता है।
कौन उठाएगा नुकसान की भरपाई?
सबसे अहम बात 'फाइनेंशियल लायबिलिटी' की है। बैंक की पॉलिसी के मुताबिक, यदि आपने किसी AI टूल को अनुमति दी है, तो उसके द्वारा किया गया कोई भी ट्रांजेक्शन 'ऑथराइज्ड' माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर AI टूल से कोई गलत या अनचाहा ट्रांजेक्शन होता है, तो बैंक उसे फ्रॉड नहीं मानेगा और नुकसान की पूरी भरपाई ग्राहक को खुद करनी होगी।
भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए सबक
यह मामला भारत के बैंकिंग सेक्टर के लिए भी बड़ा सबक है। RBI पहले ही डिजिटल क्रेडेंशियल्स की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दे चुका है। भारतीय बैंक भी ग्राहकों को सलाह देते हैं कि वे किसी भी थर्ड-पार्टी इंटरफेस पर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी और बैंकिंग का मेल बढ़ रहा है, सुरक्षा की यह जिम्मेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
