United Forum of Bank Unions ने अपनी मांगों को लेकर 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। वीकेंड से जुड़े होने के कारण बैंकों में लगातार पांच दिन तक कामकाज प्रभावित हो सकता है।
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर संकट के बादल छा गए हैं। United Forum of Bank Unions और Indian Banks’ Association के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद बैंक कर्मियों ने 28 सितंबर से तीन दिनों की हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। विरोध की मुख्य वजह '5-डे वर्किंग वीक' (हफ्ते में 5 दिन काम) को लागू करने में हो रही देरी है। यूनियंस का कहना है कि यह वादा मार्च 2024 के वेतन समझौते का हिस्सा था।
ग्राहकों पर होगा सीधा असर
यह हड़ताल महीने के आखिरी में पड़ रही है, जो वीकेंड से बिल्कुल सटकर है। इसका मतलब यह है कि बैंक की शाखाएं लगातार 5 दिनों तक बंद रह सकती हैं। हालांकि नेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप और एटीएम जैसी डिजिटल सुविधाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी, लेकिन जिन कार्यों के लिए बैंक शाखा जाना जरूरी है, जैसे कि बड़े अमाउंट के चेक क्लीयरेंस, लोन प्रोसेसिंग या फिजिकल डॉक्यूमेंटेशन, उनमें देरी होना निश्चित है।
बैंकों की एडवायजरी
State Bank of India और Punjab National Bank जैसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों ने पहले ही ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की सलाह दी है। बैंकों ने ग्राहकों से कहा है कि वे अपनी जरूरी बैंकिंग संबंधी काम 28 सितंबर से पहले ही पूरे कर लें।
सरकार के साथ गतिरोध
Department of Financial Services ने स्पष्ट किया है कि 5-डे वर्किंग का मुद्दा काफी जटिल है और इसमें सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा जरूरी है। सरकार ने यूनियंस से हड़ताल टालने की अपील की थी, लेकिन नेतृत्व अपनी बात पर अड़ा है। यदि यह गतिरोध खत्म नहीं होता है, तो अक्टूबर से और भी बड़े स्तर पर औद्योगिक कार्रवाई (Industrial Action) की चेतावनी दी गई है।
