पांच दिन के कामकाजी सप्ताह (Five-day workweek) की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी **28 सितंबर, 2026** से तीन दिनों की हड़ताल पर जा रहे हैं। सरकार और यूनियनों के बीच जारी गतिरोध के चलते ग्राहकों को परेशानी हो सकती है, हालांकि बैंकिंग सेवाओं पर असर कम करने के लिए बैंकों को रविवार को भी खुले रखने के निर्देश दिए गए हैं।
विवाद की जड़: फाइव-डे वर्किंग का मुद्दा
बैंक यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत पूरी तरह से टूट चुकी है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस का दावा है कि मार्च 2024 में हुई वेतन समझौते की बातचीत में 5-डे वर्किंग पर सहमति बनी थी, लेकिन वित्त मंत्रालय इससे साफ इनकार कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि यह मुद्दा कभी भी फॉर्मल एजेंडा का हिस्सा था ही नहीं।
परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव का पेंच
हड़ताल की एक और बड़ी वजह नवंबर 2024 में लागू की गई 'परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम' है। यह स्कीम विशेष रूप से स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों पर लागू होती है, जहाँ बोनस को परफॉर्मेंस मेट्रिक्स से जोड़ दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ 8 सितंबर को हुई मीटिंग के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे कर्मचारी काफी नाराज हैं।
ग्राहकों के लिए जरूरी गाइडलाइन्स
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ग्रामीण बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे 27 सितंबर, 2026 (रविवार) को अपनी ब्रांच खुली रखें। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि हड़ताल शुरू होने से पहले ग्राहक अपने जरूरी वित्तीय लेनदेन पूरे कर सकें।
हालांकि ब्रांच स्तर पर सेवाओं में खलल पड़ सकता है, लेकिन राहत की बात यह है कि डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे फंड ट्रांसफर, बिल पेमेंट) पहले की तरह ही काम करते रहेंगे। निवेशकों और ग्राहकों के लिए अब अगली बड़ी अपडेट सरकार और यूनियन के बीच होने वाली अगली बातचीत पर निर्भर करेगी, जिससे यह तय होगा कि क्या हड़ताल आगे और खिंचेगी या कोई बीच का रास्ता निकलेगा।
