Delhi State Consumer Disputes Redressal Commission ने एक बैंक पर **₹15.5 लाख** का जुर्माना लगाया है। मामला लोन चुकाने के बाद ग्राहक के ओरिजिनल प्रॉपर्टी पेपर्स वापस न करने से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
एक कपल ने ₹1.41 करोड़ का होम लोन पूरी तरह से चुका दिया था, लेकिन बैंक उनके ओरिजिनल प्रॉपर्टी के कागजात लौटाने में नाकाम रहा। बैंक ने पुलिस रिपोर्ट, पब्लिक नोटिस और सेल डीड की सर्टिफाइड कॉपी देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन कमीशन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि ओरिजिनल टाइटल डीड की भरपाई इन विकल्पों से नहीं हो सकती।
प्रॉपर्टी के मालिकाना हक का संकट
प्रॉपर्टी के मालिक के लिए ओरिजिनल सेल डीड सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसके बिना भविष्य में प्रॉपर्टी बेचना या उसे गिरवी रखकर लोन लेना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट ने माना कि डुप्लीकेट या सर्टिफाइड कॉपियों का कानूनी महत्व ओरिजिनल के बराबर नहीं होता, जिससे मकान मालिक को लंबी अवधि का वित्तीय जोखिम उठाना पड़ सकता है।
बैंक की जवाबदेही और जुर्माना
इससे पहले बैंकिंग ओम्बड्समैन ने कपल को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन कमीशन ने इसे बढ़ाकर ₹15.5 लाख कर दिया। इसमें मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च भी शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 2 महीने के भीतर भुगतान नहीं हुआ, तो बैंक को 3 मार्च 2021 से 9% सालाना की दर से अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा। यह फैसला बैंकों के लिए एक कड़ा सबक है कि वे अपने पास गिरवी रखे गए ग्राहकों के दस्तावेजों की सुरक्षा में लापरवाही न बरतें।
