बैंक खातों में नॉमिनी बनाना पैसा निकालने की प्रक्रिया को आसान जरूर बनाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नॉमिनी ही संपत्ति का असली मालिक है। नए 2026 बैंकिंग नियमों के बीच यह समझना जरूरी है कि नॉमिनी सिर्फ एक कस्टोडियन (Custodian) है।
बहुत से लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि बैंक खाते में नाम दर्ज कराने का मतलब है कि वही व्यक्ति पैसा पाने का असली हकदार है। असल में, बैंक नॉमिनेशन केवल एक प्रशासनिक (Administrative) प्रक्रिया है, कानूनी नहीं। खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक का काम सिर्फ अपना दायित्व पूरा करना और नॉमिनी को पैसा सौंपना है।
नॉमिनी की भूमिका क्या है?
कानूनी तौर पर नॉमिनी एक 'ट्रस्टी' या 'कस्टोडियन' की तरह काम करता है। सुप्रीम कोर्ट के 'शक्ति यजदानी' (Shakti Yezdani) केस जैसे कई फैसलों में यह स्पष्ट हो चुका है कि नॉमिनी को मिलने वाला पैसा असली कानूनी उत्तराधिकारियों के लिए होता है। अगर नॉमिनी और कानूनी वारिसों के बीच विवाद होता है, तो नॉमिनी को वसीयत (Will) या विरासत के कानूनों के अनुसार ही पैसा बांटना होगा।
2026 के नए बैंकिंग नियम
'बैंकिंग लॉज़ अमेंडमेंट एक्ट 2025' के तहत 2026 से नॉमिनेशन के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं:
- मल्टीपल नॉमिनी: अब आप एक खाते में 4 नॉमिनी तक चुन सकते हैं।
- समय सीमा: बैंक को सभी जरूरी कागजात मिलने के 15 दिन के भीतर क्लेम सेटल करना अनिवार्य होगा।
ये बदलाव प्रक्रिया को तेज तो करेंगे, लेकिन यह ध्यान रहे कि नॉमिनी अब भी केवल एक जरिया (Conduit) है, अंतिम लाभार्थी नहीं।
वसीयत का महत्व
भले ही नॉमिनेशन से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) जैसे कठिन दस्तावेजों की जरूरत कम हो जाती है, लेकिन यह कानूनी विवादों को पूरी तरह खत्म नहीं करता। अगर वसीयत नहीं है या परिवार के बीच मतभेद हैं, तो बैंक कानूनी दस्तावेजों की मांग कर सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह है कि वे केवल नॉमिनेशन पर निर्भर न रहें। अपनी संपत्ति की योजना (Estate Planning) को बेहतर बनाने के लिए एक स्पष्ट 'वसीयत' जरूर तैयार रखें और समय-समय पर बैंक रिकॉर्ड्स को अपडेट करते रहें।
