Bank Nifty में आई गिरावट: PSU बैंकों पर दबाव, जानें बाजार में क्यों दिखी बिकवाली

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AuthorAditya Rao|Published at:
Bank Nifty में आई गिरावट: PSU बैंकों पर दबाव, जानें बाजार में क्यों दिखी बिकवाली

24 अगस्त को Bank Nifty में गिरावट का दौर लौटा। दो दिन की तेजी पर ब्रेक लगाते हुए यह इंडेक्स **0.7%** लुढ़ककर **57,359** पर बंद हुआ। इस बिकवाली की अगुआई पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) बैंकों ने की।

क्यों आई बाजार में गिरावट?

गुरुवार, 24 अगस्त को Bank Nifty में अचानक गिरावट देखी गई, जिसने पिछले दो दिनों की तेजी पर पानी फेर दिया। निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) का रुख अपनाया, जिससे पूरे फाइनेंशियल सेक्टर में बिकवाली हावी रही। लेकिन सबसे ज्यादा दबाव पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) बैंकों पर देखने को मिला।

ग्लोबल संकेतों का असर

बैंकिंग शेयरों में आई यह गिरावट सिर्फ डोमेस्टिक वजहों से नहीं थी, बल्कि ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स को लेकर भी चिंताएं बढ़ीं। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई दर पर पड़ सकता है। इसके अलावा, ईरान पर संभावित नए अमेरिकी प्रतिबंधों की खबरें भी ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल बना रही हैं। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए ऊंची कीमतें रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे ट्रेडर्स जोखिम से बचने का रास्ता अपना रहे हैं।

PSU बैंक क्यों फिसले?

ट्रेडिंग सेशन के दौरान PSU बैंकों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) और केनरा बैंक (Canara Bank) जैसे बड़े नाम इंडेक्स के लिए बड़ी वजह बने। ये स्टॉक्स अक्सर सेंटिमेंट और ब्रॉडर मार्केट ट्रेंड्स के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। PSU स्पेस के अलावा, प्राइवेट सेक्टर के बैंक जैसे एक्सिस बैंक (Axis Bank), कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank), फेडरल बैंक (Federal Bank) और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। यह व्यापक कमजोरी दर्शाती है कि बाजार सहभागियों (Market Participants) द्वारा कमाई के आउटलुक और ग्लोबल मैक्रो सिचुएशन पर स्पष्टता आने तक फिलहाल ज्यादा जोखिम लेने से बचा जा रहा है।

आगे क्या हैं अहम लेवल्स?

अब ट्रेडर्स और निवेशकों का ध्यान अहम टेक्निकल सपोर्ट लेवल्स पर है, ताकि यह देखा जा सके कि इंडेक्स स्थिर हो पाता है या नहीं। एनालिस्ट 57,500 के लेवल पर कड़ी नजर रख रहे हैं। इस लेवल से ऊपर लगातार बने रहना मजबूती का संकेत माना जाएगा, जबकि इसके नीचे लगातार गिरने पर 56,700 जैसे निचले सपोर्ट जोन का परीक्षण हो सकता है। दूसरी ओर, अगर इंडेक्स में फिर से तेजी आती है और यह 58,000 का लेवल पार कर लेता है, तो यह संकेत दे सकता है कि हालिया बिकवाली केवल एक अस्थायी सुधार थी, न कि ट्रेंड में बदलाव।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.