28 सितंबर को Bank Nifty करीब **2%** फिसलकर **54,500** के स्तर पर आ गया। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर रुपये के कारण बैंकिंग शेयरों में चौतरफा बिकवाली देखी गई है।
बाजार में मची बिकवाली
28 सितंबर को बैंकिंग सेक्टर के लिए दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहा। Bank Nifty में 2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे इंडेक्स 54,500 के स्तर तक लुढ़क गया। बिकवाली का असर हर तरफ दिखा, जहां HDFC Bank, State Bank of India और ICICI Bank जैसे दिग्गजों में करीब 2% की गिरावट आई, वहीं Yes Bank, Union Bank of India और IDFC First Bank जैसे शेयरों में 2.7% से 4% तक का तगड़ा करेक्शन देखने को मिला।
क्यों दबाव में है बैंकिंग सेक्टर?
इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में हलचल है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) के दाम 2.3% उछलकर $106.7 प्रति बैरल पहुंच गए हैं। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए आयात खर्च और महंगाई का दबाव बढ़ाती हैं। इसके साथ ही रुपया भी डॉलर के मुकाबले 95.95 के स्तर पर कमजोर हुआ है। ऐसे में बाजार को डर है कि RBI महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों (Interest Rates) में सख्त रुख अपना सकता है।
निवेशकों की चिंताएं
बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी पर दो तरफा मार पड़ सकती है। पहली, ऊंची ब्याज दरों से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर असर पड़ता है। दूसरी, बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) बढ़ने से सरकारी बॉन्ड में निवेश किए गए बैंकों के खजाने (Treasury Income) की वैल्यू गिर सकती है।
क्या है टेक्निकल चार्ट्स का हाल?
फिलहाल, इंडेक्स 54,000 से 54,500 के सपोर्ट जोन की परीक्षा ले रहा है। मार्केट जानकारों का मानना है कि यदि इंडेक्स इस रेंज को बचाने में नाकाम रहा, तो वोलेटिलिटी और बढ़ सकती है। रिकवरी के लिए इंडेक्स को 56,200 के स्तर को फिर से हासिल करना बेहद जरूरी है। फिलहाल, सभी की नजरें क्रूड ऑयल की चाल और RBI के अगले कदम पर टिकी हैं।
