शुक्रवार को Bank Nifty इंडेक्स 58,000 के ऊपर निकल गया। Nifty PSU Bank इंडेक्स में आई **3%** की ज़बरदस्त उछाल ने इसे सपोर्ट किया। पब्लिक सेक्टर के बैंकों जैसे Union Bank of India के शानदार प्रदर्शन से यह रिकवरी आई है। अब देखना यह है कि क्या यह लेवल आगे के लिए एक मजबूत आधार बना पाता है।
बैंकिंग सेक्टर में जोश
शुक्रवार को Bank Nifty इंडेक्स 58,000 के पार ट्रेड करता दिखा, जो कि बैंकिंग सेक्टर के लिए लगातार दूसरे दिन की बढ़त है। दिन के कारोबार में इंडेक्स 58,251.95 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा और बाद में 58,100 के आसपास कारोबार करता रहा। यह तेज़ी बाज़ार के ओवरआल ट्रेंड से बेहतर सेंटीमेंट दिखा रही है, जिसका मुख्य कारण पब्लिक सेक्टर के बैंकों में आई मज़बूत खरीदारी है।
PSU बैंक, प्राइवेट बैंकों पर भारी
आज के प्रदर्शन में पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने बाज़ी मारी। Nifty PSU Bank इंडेक्स में 3% से ज़्यादा का उछाल देखा गया, जबकि Nifty Private Bank इंडेक्स महज़ 1.2% के आसपास बढ़ा। सरकारी बैंकों की इस तेज़ी में Indian Bank के तिमाही नतीजों पर आई पॉजिटिव रिएक्शन का भी बड़ा हाथ रहा। पब्लिक सेक्टर में Union Bank of India के शेयरों में करीब 5% का इजाफा हुआ, वहीं Canara Bank, Bank of Baroda, और Punjab National Bank जैसे बड़े लेंडर्स ने भी इंडेक्स को ऊपर ले जाने में मदद की।
टेक्निकल लेवल और बाज़ार का कांटेक्स्ट
बाज़ार की नज़र में 58,000 का लेवल एक अहम टेक्निकल पॉइंट है। इंडेक्स अभी कई छोटे-मंज़िल के मूविंग एवरेज (moving average) से ऊपर चल रहा है, और 200-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (simple moving average) के ऊपर वापस आना टेक्निकल एनालिस्ट्स के लिए ध्यान देने वाली बात है। हालांकि मौजूदा मोमेंटम पॉजिटिव लग रहा है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या इंडेक्स इस साइकोलॉजिकल लेवल से ऊपर बना रह पाता है या नहीं, जो कि यह तय करेगा कि वह आगे और ऊपर जा पाएगा या नहीं।
निवेशकों के लिए क्या है खास
इंडेक्स की मज़बूती के बावजूद, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि फाइनेंशियल सेक्टर मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा, इंटरेस्ट रेट्स और क्रेडिट ग्रोथ के ट्रेंड्स के प्रति काफी सेंसिटिव रहता है। इस रिकवरी की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या मौजूदा बाइंग इंटरेस्ट कुछ बड़े शेयरों से आगे बढ़कर पूरे सेक्टर में देखने को मिलता है। बाज़ार के लिए अगला अहम कदम यह देखना होगा कि Bank Nifty क्लोजिंग तक 58,000 के ऊपर अपनी पोजीशन बनाए रख पाता है या नहीं, जिससे यह साफ होगा कि यह ट्रेंड फंडामेंटल बदलावों के कारण है या सिर्फ शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग का नतीजा।
