पिछले 5 सालों में पब्लिक सेक्टर बैंकों में लॉकर चोरी के **40** मामले सामने आए हैं। वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इन मामलों में बैंक की जिम्मेदारी फिक्स है, और ग्राहकों को मैक्सिमम एनुअल रेंट का **100** गुना ही हर्जाना मिलेगा।
लॉकर चोरी की क्या है सच्चाई?
वित्त मंत्रालय ने हाल ही में राज्यसभा को सूचित किया है कि 2021-22 से 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर के बीच पब्लिक सेक्टर बैंकों में लॉकर चोरी की 40 घटनाएं दर्ज की गई हैं। यह खुलासा उन लाखों ग्राहकों के लिए अहम है जो बैंक लॉकर में अपनी कीमती चीजें सुरक्षित रखते हैं। देश भर में 11.1 मिलियन से ज़्यादा बैंक लॉकर चालू हैं।
बैंक की जवाबदेही कितनी?
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया है कि आग, चोरी, सेंधमारी, लूटपाट, इमारत गिरने या बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से होने वाले नुकसान के लिए बैंक जिम्मेदार होंगे। लेकिन, उनकी यह जिम्मेदारी असीमित नहीं है। अगर किसी मामले में लापरवाही साबित होती है, तो बैंक को ग्राहक से लिए गए लॉकर के सालाना किराए का 100 गुना से ज़्यादा हर्जाना नहीं देना होगा।
उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक लॉकर के लिए सालाना ₹5,000 किराया देता है, तो लापरवाही के साबित होने पर बैंक की अधिकतम देनदारी ₹5 लाख होगी। यह रकम लॉकर में रखे सोने, गहनों या जरूरी कागजात की कुल कीमत से काफी कम हो सकती है, ऐसे में ग्राहक का नुकसान ज़्यादा हो सकता है।
RBI के नियम और आगे क्या?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2021 में लॉकर की सुरक्षा को लेकर नए नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत बैंकों को लॉकर एक्सेस, पहचान वेरिफिकेशन और तिजोरी की सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है। सरकार का यह खुलासा इस बात की याद दिलाता है कि बैंक सुरक्षा मानकों का पालन तो करें, लेकिन ग्राहकों को मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा एक तय सीमा में ही है। ऐसे में, ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने लॉकर एग्रीमेंट की शर्तों को ध्यान से पढ़ें और कीमती सामान के लिए अलग से बीमा (Insurance) कराने पर विचार करें।
