बंधन बैंक (Bandhan Bank) ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बैंक **₹304 करोड़** के फंसे हुए हाउसिंग लोंस (NPAs) को एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) को बेचने की तैयारी में है। इस सौदे के लिए बैंक 'स्विस चैलेंज' बिडिंग मेथड का इस्तेमाल करेगी। यह कदम Q4FY26 में बैंक के **68%** मुनाफे में बढ़ोतरी के बाद आया है।
क्या हुआ?
बंधन बैंक (Bandhan Bank) के बोर्ड ने हाउसिंग फाइनेंस डिविजन से नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) के एक हिस्से को बेचने की मंजूरी दे दी है। बैंक 31 मई 2026 तक के ₹303.74 करोड़ के उन कर्जों को बेचेगा जो 180 दिनों से ज्यादा समय से NPA हैं। इस बिक्री को पूरा करने के लिए, बैंक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) से बोलियां आमंत्रित करेगा और इसके लिए 'स्विस चैलेंज' मेथड का इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में, बैंक को मिली पहली बोली के आधार पर दूसरी कंपनियां भी बोली लगा सकेंगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि फंसे हुए एसेट्स की सबसे अच्छी कीमत मिले।
निवेशकों के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण?
निवेशकों के लिए, फंसे हुए कर्जों (bad loans) की बिक्री बैंकों द्वारा अपनी बैलेंस शीट को साफ करने की एक आम रणनीति है। जब बैंक किसी NPA को ARC को बेचता है, तो जोखिम और वसूली की जिम्मेदारी एक विशेषज्ञ कंपनी के पास चली जाती है। इससे बैंक के ग्रॉस NPA के आंकड़े कम होते हैं और मैनेजमेंट का कीमती समय बचता है। हालांकि, इसमें बैंक को कुछ वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि अक्सर ये लोन मौजूदा बुक वैल्यू से कम कीमत पर बेचे जाते हैं। निवेशकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि ये एसेट्स किस अंतिम कीमत पर बिकते हैं, क्योंकि इससे बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी और कैपिटल पर पड़ने वाले असर का पता चलेगा।
वित्तीय और कारोबारी संदर्भ
यह फैसला बैंक के Q4FY26 के नतीजों के बाद आया है, जिसमें बैंक ने ₹534 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 68% ज्यादा है। हालांकि बॉटम-लाइन प्रॉफिट में भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) - जो लोन पर कमाए गए ब्याज और डिपॉजिट पर दिए गए ब्याज का अंतर है - में मामूली 1.4% की बढ़ोतरी होकर ₹2,795.4 करोड़ रही। NII में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद प्रॉफिट में वृद्धि यह दर्शाती है कि कम प्रोविजनिंग या नॉन-इंटरेस्ट इनकम जैसे अन्य कारकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। एसेट क्वालिटी में सुधार बैंक के लिए एक अहम लक्ष्य है; ग्रॉस NPA रेशियो पिछले तिमाही के 3.33% से सुधरकर 3.27% हो गया, और नेट NPA 0.97% पर रिपोर्ट किया गया।
लोन और डिपॉजिट के रुझान
बंधन बैंक के ओवरऑल बिजनेस मैट्रिक्स में मिले-जुले रुझान देखे गए। मार्च 2026 के अंत तक, बैंक की लोन बुक (ऑन-बुक और PTC एसेट्स सहित) ₹1.54 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 12.6% अधिक है। कुल डिपॉजिट 10% बढ़कर ₹1.66 लाख करोड़ हो गए। रिटेल डिपॉजिट में 17.7% की बढ़ोतरी एक खास बात है, जो अब बैंक की कुल डिपॉजिट का लगभग 74% है। वहीं, बल्क डिपॉजिट में 6.9% की गिरावट आई है, जो फंड की एक अधिक विस्तृत और स्थिर संरचना की ओर बदलाव का संकेत देता है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
आगे चलकर, निवेशक इस एसेट बिक्री से संबंधित कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बिक्री कब पूरी होती है और रिकवरी की अंतिम राशि क्या रहती है। अगर बैंक इन एसेट्स को मौजूदा बुक वैल्यू के करीब बेचने में कामयाब रहता है, तो इसे सकारात्मक रूप से देखा जाएगा। इसके विपरीत, अगर बड़ी छूट देनी पड़ती है, तो यह तत्काल कमाई को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, बाजार प्रतिभागी CASA (करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट) डिपॉजिट के रुझान पर नजर रखना जारी रखेंगे, जो 2.8% बढ़कर ₹48,751 करोड़ हो गए हैं, और बैंक की 131.76% के लिक्विडिटी कवरेज रेशियो को बनाए रखने की क्षमता पर भी। कलेक्शन एफिशिएंसी में निरंतर सुधार, जो हाल की तिमाही में 98.9% था, लंबे समय तक एसेट क्वालिटी के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
