Bandhan Bank के शेयरधारकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी ने FY27 के लिए अपने रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) गाइडेंस में कटौती की है, जिसके चलते शेयर **17%** तक गिर गए। इस तिमाही में नेट प्रॉफिट **35%** बढ़ा है, लेकिन लोन ग्रोथ में सुस्ती और ऑपरेटिंग खर्चों में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
Detailed Coverage
RoA गाइडेंस में कटौती का असर
नई दिल्ली: Bandhan Bank के शेयर बीएसई (BSE) पर ₹173.40 पर बंद हुए, जो कि जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों के बाद एक बड़ी गिरावट है। बैंक ने भले ही नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 35% का इजाफा दर्ज कर ₹502 करोड़ कमाए हों, लेकिन मैनेजमेंट द्वारा RoA गाइडेंस में 40 बेसिस पॉइंट की कटौती ने निवेशकों का ध्यान खींचा। FY27 के लिए अब नया गाइडेंस 1.2% से 1.4% के बीच रहने का अनुमान है, जो बैंक की भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर एक सतर्क संकेत है।
ऑपरेटिंग खर्च और लोन ग्रोथ पर दबाव
RoA गाइडेंस में इस कटौती के पीछे मुख्य रूप से दो वजहें हैं: पहला, इंटरेस्ट मार्जिन में 30 बेसिस पॉइंट का दबाव और दूसरा, ऑपरेटिंग खर्चों में 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी। बैंक का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो 61.5% रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 188 बेसिस पॉइंट ज्यादा है। बढ़ते ऑपरेटिंग खर्चों के चलते प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट में पिछली तिमाही के मुकाबले 6% की गिरावट आई है।
निवेशकों के लिए चिंता की एक और बड़ी वजह लोन बुक का प्रदर्शन है। कुल लोन ग्रोथ में पिछली तिमाही की तुलना में 1% की गिरावट दर्ज की गई, और माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में भी कमी आई है। यह धीमी पड़ती लैंडिंग एक्टिविटी, मैनेजमेंट के पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए 14% का क्रेडिट ग्रोथ हासिल करने के लक्ष्य के विपरीत है।
मार्केट आउटलुक और चुनौतियाँ
फाइनेंशियल एनालिस्ट्स का मानना है कि बैंक को रेवेन्यू की तुलना में खर्चों को तेज़ी से बढ़ाने में दिक्कत हो रही है, जिसे ऑपरेटिंग लिवरेज कहते हैं। मैक्वेरी कैपिटल (Macquarie Capital) की फाइनेंशियल सर्विसेज रिसर्च टीम ने बताया कि मार्जिन की बाधाएं और ऊंचे ऑपरेटिंग खर्चों के चलते RoA में सुधार का रास्ता फिलहाल धुंधला दिख रहा है। हालांकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन 6.2% पर स्थिर रहे, लेकिन लोन बुक को बढ़ाने और बढ़ते खर्चों को कंट्रोल करने में बैंक की अक्षमता नियर-टर्म अर्निंग्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि बैंक लोन ग्रोथ को कैसे रिवाइव करता है और कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो को कैसे स्थिर करता है। खासकर, 14% क्रेडिट ग्रोथ के लक्ष्य को पूरा करने की बैंक की क्षमता पर बाज़ार की पैनी नजर रहेगी। अगर लोन डिस्बर्समेंट में कोई और निराशा मिलती है या ऑपरेटिंग खर्चों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो यह बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी पर और दबाव डाल सकता है।
