बंधन बैंक ने Q1 FY27 के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं, जिसमें 35% की बढ़ोतरी के साथ ₹502 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया गया है। यह उछाल बैड लोन प्रोविजन्स में 40% की कमी से संभव हुआ। हालांकि, लोन ग्रोथ 16.4% बढ़ी है, लेकिन बैंक डिपॉजिट ग्रोथ धीमी रहने के चलते अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है।
Detailed Coverage
मुनाफे में आई 35% की तेजी, वजह क्या है?
बंधन बैंक ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹502 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 35% ज्यादा है। इस शानदार मुनाफे की मुख्य वजह प्रोविजन्स (प्रावधान) में हुई बड़ी कटौती है। बैंक ने इस तिमाही में प्रोविजन्स पर ₹680 करोड़ खर्च किए, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा ₹1,150 करोड़ था। प्रोविजन्स वे फंड होते हैं जिन्हें बैंक बैड लोन से होने वाले संभावित नुकसान को कवर करने के लिए अलग रखता है। इनमें कमी का सीधा असर बैंक के मुनाफे पर पड़ता है।
एसेट क्वालिटी और लोन पोर्टफोलियो का हाल
तिमाही के दौरान बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेश्यो, जो बैड लोन का प्रतिशत दिखाता है, पिछले क्वार्टर की तुलना में 12 बेसिस पॉइंट घटकर 3.1% पर आ गया है। इसी तरह, नेट NPA रेश्यो 4 बेसिस पॉइंट सुधरकर 0.9% हो गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि बैंक की क्रेडिट मैनेजमेंट प्रक्रिया पहले से बेहतर हुई है, जिससे भविष्य के जोखिम कम हो सकते हैं।
बैंक के एडवांसेज (लोन) में सालाना आधार पर 16.4% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹1.55 ट्रिलियन तक पहुंच गया। रिटेल और होलसेल सेगमेंट से मजबूत मांग के कारण यह ग्रोथ संभव हुई, जिसमें क्रमशः 45% और 38% की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, हाउसिंग लोन बुक में 6% की धीमी ग्रोथ दर्ज की गई। माइक्रो-फाइनेंस पोर्टफोलियो में मामूली गिरावट आई, जो पिछले साल के ₹52,812 करोड़ की तुलना में घटकर ₹52,641 करोड़ रह गया।
फंडिंग को लेकर नई रणनीति
जहां एक ओर बैंक का लेंडिंग बिजनेस रफ्तार पकड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर डिपॉजिट ग्रोथ थोड़ी धीमी रही है, जो केवल 6.6% बढ़कर ₹1.64 ट्रिलियन हुई है। यह लिक्विडिटी (नकदी) को लेकर एक चुनौती पेश कर सकता है, क्योंकि बैंकों को अपने लोन देने की गतिविधियों को फंड करने के लिए लगातार सस्ते डिपॉजिट की जरूरत होती है।
इस स्थिति से निपटने के लिए, बैंक ने महंगे और अस्थिर बल्क डिपॉजिट पर अपनी निर्भरता कम कर दी है, जो सालाना आधार पर 12.7% घटे हैं। इसके बजाय, बैंक ने ज्यादा स्थिर रिटेल डिपॉजिट में 16% की बढ़ोतरी पर ध्यान केंद्रित किया है।
बैंक के CEO, पारथा प्रतिम दासगुप्ता ने घर की बचत को आकर्षित करने की इंडस्ट्री-व्यापी चुनौती को स्वीकार किया है। इसके जवाब में, बैंक वैकल्पिक फंडिंग रणनीतियों पर विचार कर रहा है, जैसे कि मार्केट से उधार लेना और लोन एसेट्स का सिक्युरिटाइजेशन (लोन को बेचकर नकदी जुटाना)। इसके अलावा, बैंक ने नॉन-रेजिडेंट इंडियंस के लिए फॉरेन करेंसी डिपॉजिट स्कीम, FCNR(B) को भी शुरू किया है, ताकि फंडिंग बेस को बढ़ाया जा सके। निवेशक आने वाले तिमाहियों में देखेंगे कि क्या ये प्रयास लोन ग्रोथ और डिपॉजिट जुटाने के बीच के अंतर को कम करने में सफल होते हैं।
