बंधन बैंक (Bandhan Bank) के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। बैंक के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, राजीव मन्त्री (Rajeev Mantri) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वो 25 सितंबर, 2026 तक बैंक के साथ बने रहेंगे।
क्या हुआ?
बंधन बैंक ने 29 जून, 2026 को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उनके CFO राजीव मन्त्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बैंक के मुताबिक, मन्त्री अपने करियर में आगे बढ़ने के अवसरों की तलाश में यह कदम उठा रहे हैं। वो 25 सितंबर, 2026 तक अपने पद पर बने रहेंगे। कोलकाता स्थित इस प्राइवेट बैंक ने अभी तक मन्त्री के उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा नहीं की है।
मैनेजमेंट में बदलाव का दौर
राजीव मन्त्री फरवरी 2024 में ही बंधन बैंक से जुड़े थे। इससे पहले वे सिटी इंडिया (Citi India) और ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) जैसी कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। मन्त्री का यह इस्तीफा इस साल बैंक में मैनेजमेंट में हुए दूसरे बड़े बदलाव को दर्शाता है। इससे पहले अप्रैल 2026 में, बैंक के इमर्जिंग आंत्रप्रेन्योर्स बिजनेस (EEB) के हेड, विशाल वाधवा (Vishal Wadhwa) ने भी इस्तीफा दे दिया था। ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब बैंक अपने माइक्रोफाइनेंस-केंद्रित मॉडल से हटकर रिटेल और कमर्शियल बैंकिंग में विविधीकरण (diversification) की ओर बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
किसी भी कंपनी के CFO का इस्तीफा निवेशकों के लिए चिंता का विषय होता है, क्योंकि यह पद वित्तीय रिपोर्टिंग, पूंजी योजना और निवेशक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। बंधन बैंक फिलहाल एक बड़े स्ट्रेटेजिक ट्रांसफॉर्मेशन के दौर से गुजर रहा है, जिसमें वह अपनी कैपिटल स्ट्रेटेजी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और लोन बुक को संतुलित कर रहा है। ऐसे में, फाइनेंस डिपार्टमेंट में नेतृत्व की स्थिरता (leadership stability) निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
निवेशकों को क्या देखना होगा?
शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी निगरानी यह होगी कि बैंक जल्द से जल्द मन्त्री के उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा करे। बाज़ार यह देखना चाहेगा कि इस बदलाव के दौरान फाइनेंस फंक्शन में स्थिरता बनी रहेगी, खासकर तब जब बैंक बदल रहे ब्याज दर माहौल (interest rate environment) से निपट रहा है और अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने का लक्ष्य रख रहा है। निवेशक बैंक के मैनेजमेंट से इस बात पर भी टिप्पणी की उम्मीद कर सकते हैं कि मौजूदा कैपिटल एलोकेशन प्लान्स (capital allocation plans) और बिजनेस मॉडल के विस्तार की दिशा में क्या निरंतरता रहेगी।
