Gold Loan Sector: Bajaj और Piramal का बड़ा कदम, गोल्ड लोन में बढ़ता रिपेमेंट स्ट्रेस

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold Loan Sector: Bajaj और Piramal का बड़ा कदम, गोल्ड लोन में बढ़ता रिपेमेंट स्ट्रेस

गोल्ड लोन देने वाली दिग्गज NBFCs में अब रिपेमेंट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। Bajaj Finance ने बढ़ते डिफॉल्ट्स के कारण शॉर्ट-टर्म प्रोडक्ट्स को बंद कर दिया है, जबकि Piramal Finance ने कर्जदार के ऊपर बढ़ते अन्य लोन के बोझ को लेकर चेतावनी जारी की है।

गोल्ड लोन सेक्टर, जिसने पिछले एक साल में रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार देखी है, अब वहां पहली बार तनाव के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं। Bajaj Finance और Piramal Finance जैसी दिग्गज NBFCs ने अब अपने लेंडिंग स्टैंडर्ड्स को सख्त करना शुरू कर दिया है क्योंकि उन्हें बॉरोअर्स की पेमेंट हिस्ट्री में गिरावट नजर आ रही है।

Bajaj Finance का सख्त रुख

Bajaj Finance ने प्रोएक्टिव कदम उठाते हुए अपने शॉर्ट-टर्म गोल्ड लोन प्रोडक्ट्स को बंद कर दिया है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी के स्टेज-2 और स्टेज-3 एसेट्स (जो लोन 30 दिन से ज्यादा ओवरड्यू हैं) में 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी देखी गई है। रिटेल लेंडर के लिए ओवरड्यू अकाउंट्स में यह उछाल सीधे तौर पर कड़े फैसलों को ट्रिगर करता है।

कर्जदारों पर कर्ज का बोझ

Piramal Finance के मुताबिक, गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक अब मल्टीपल डेट ट्रैप में फंस रहे हैं। कंपनी के एनालिस्ट अपडेट के अनुसार, उनके लगभग 35% गोल्ड लोन ग्राहकों के पास पहले से ही दूसरे लेंडर्स के सक्रिय क्रेडिट लाइन मौजूद हैं। यह बताता है कि भले ही गोल्ड एक सुरक्षित एसेट है, लेकिन कर्जदारों की कैश-फ्लो स्थिति पहले के मुकाबले काफी कमजोर हुई है।

सेक्टर का हाल

इंडस्ट्री में तेजी का आलम यह है कि अगस्त 2026 तक बैंकों का गोल्ड लेंडिंग 83% उछलकर ₹5.6 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, NBFCs का लेंडिंग पोर्टफोलियो 69% बढ़कर ₹3.6 ट्रिलियन हो गया है। हालांकि, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के डेटा बताते हैं कि लगभग ₹4.7 ट्रिलियन का लोन उन ग्राहकों को दिया गया, जो सिस्टम में पहले से ही 90 दिन से ज्यादा डिफाल्टर थे।

निवेशकों के लिए संकेत

फिलहाल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से रेगुलेटरी सख्ती की संभावना और बढ़ती महंगाई लेंडर्स के लिए चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। अब निवेशकों का ध्यान वॉल्यूम ग्रोथ से हटकर 'एसेट क्वालिटी' पर शिफ्ट हो गया है। आने वाली तिमाही के नतीजों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या डिफॉल्ट का स्तर स्थिर होता है या यह और बढ़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.