Bajaj Housing Finance के शेयर में आई भारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी के शेयर अपने IPO के बाद के उच्चतम स्तर ₹188.5 से गिरकर फिलहाल ₹88.3 के आसपास कारोबार कर रहे हैं। यह 53% से ज्यादा की बड़ी गिरावट है, जो पिछले छह महीनों में ही 22.2% रही है। इन सबके बीच, कंपनी के Q3 के नतीजे आने वाले हैं, जिस पर बाजार की बारीकी से नजर है।
ऑपरेशनल ग्रोथ और शेयर में गिरावट का विरोधाभास
जहां एक ओर शेयर में गिरावट दिख रही है, वहीं कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस (operational performance) के आंकड़े काफी मजबूत हैं। Q3 फाइनेंशियल ईयर 2026 में, कंपनी का ग्रॉस डिस्बर्समेंट (gross disbursement) 31% बढ़कर ₹16,535 करोड़ पर पहुंच गया। इसी तरह, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी 23% बढ़कर करीब ₹1.33 लाख करोड़ हो गया, जबकि लोन एसेट्स ₹1.17 लाख करोड़ रहे।
यह विरोधाभास यानी ऑपरेशनल ग्रोथ और शेयर के गिरते दाम के बीच की खाई, निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि Q3 नतीजों में कंपनी की कोर इनकम (core income) और एसेट क्वालिटी (asset quality) पर खास ध्यान दिया जाएगा। शेयर बाजार इस बात का इंतजार कर रहा है कि इन नंबर्स से कंपनी के फंडामेंटल की असल तस्वीर सामने आए।
प्रमोटर बिकवाली और वैल्यूएशन का दबाव
याद दिला दें कि Bajaj Housing Finance ने ₹70 के IPO प्राइस से लिस्टिंग के समय 100% से अधिक का प्रीमियम दिखाया था, लेकिन बाद में इसमें तेज गिरावट आई। 30 जनवरी 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप ₹75,699 करोड़ था। शेयर में गिरावट की एक बड़ी वजह प्रमोटर (parent Bajaj Finance Ltd.) द्वारा स्टेक बेचना भी रहा है, जो मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (minimum public shareholding) की जरूरत को पूरा करने के लिए किया गया। इस बिकवाली के दबाव ने शेयर की कीमतों को नीचे धकेलने में भूमिका निभाई है।
मौजूदा समय में, कंपनी का P/E ratio करीब 31-32x है, जो इंडस्ट्री के औसत 25x के मुकाबले ज्यादा है। इस प्रीमियम वैल्यूएशन पर निवेशक कंपनी की अर्निंग्स (earnings) और एसेट क्वालिटी को लेकर और भी सतर्क हैं।
सेक्टर का माहौल और आगे की राह
भारतीय हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर अभी मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है, लेकिन ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और रेगुलेटरी बदलाव (regulatory changes) जैसे जोखिम भी मौजूद हैं। ऐसे में Bajaj Housing Finance के लिए यह साबित करना अहम है कि वह इस माहौल में कैसे सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी (sustainable profitability) बनाए रखती है।
घरेलू ब्रोकरेज फर्म्स (brokerage firms) Q3 के लिए मजबूत नतीजे आने की उम्मीद कर रही हैं। अनुमान है कि नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) और नेट प्रॉफिट (net profit) में 20% से ज्यादा की सालाना ग्रोथ देखी जा सकती है। निवेशकों को मैनेजमेंट की ओर से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में कमी, फंडिंग कॉस्ट (funding costs), और एसेट क्वालिटी पर कमेंट्री का इंतजार रहेगा। अगर नतीजे उम्मीदों के मुताबिक आते हैं और कंपनी अपने ग्रोथ, रिस्क मैनेजमेंट (risk management) और कॉम्पिटिटिव लैंडिंग एनवायरनमेंट (competitive lending environment) को लेकर स्पष्टता देती है, तो शेयर में स्थिरता आने और गिरावट से उबरने की उम्मीद की जा सकती है।