Bajaj General के CEO Tapan Singhel ने IRDAI से अपील की है कि इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नियमों को भावनाओं के बजाय डेटा के आधार पर तय किया जाए। इसके साथ ही, कंपनी ने Swiss Re के साथ मिलकर कॉर्पोरेट रिस्क मार्केट में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति बनाई है।
इंश्योरेंस इंडस्ट्री में फिलहाल बड़े बदलावों का दौर चल रहा है। Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री और मैनेजमेंट के तरीकों को बदलने की तैयारी कर रहा है। इसी बीच, Bajaj General Insurance के MD और CEO, Tapan Singhel ने रेगुलेटर के प्रस्तावों पर एक 'डेटा-ड्रिवन' अप्रोच अपनाने की वकालत की है। इन प्रस्तावों में इंश्योरेंस कमीशन पर सख्त कैप और मैनेजमेंट खर्च (Expense of Management या EoM) पर सीमाएं तय करना शामिल है।
इंडस्ट्री के तर्क क्या हैं?
इन्सुरर्स का कहना है कि वे पहले से ही ग्राहकों को काफी वैल्यू दे रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 के डेटा के अनुसार, कंपनियों ने कुल प्रीमियम का 87.3% हिस्सा क्लेम्स के रूप में लौटाया है, जो पिछले साल 86.2% था। कंपनियों का मानना है कि यह हाई लॉस रेशियो साबित करता है कि मौजूदा सिस्टम प्रभावी है। इंडस्ट्री को डर है कि कमीशन में भारी कटौती से इंटरमीडियरीज के मार्जिन घटेंगे, जिससे इंश्योरेंस की पहुंच कम हो सकती है।
नई साझेदारी से बढ़ेगी ताकत
रेगुलेटरी चुनौतियों के बीच, Bajaj General Insurance अपने कारोबार को डाइवर्सिफाई कर रही है। कंपनी ने ग्लोबल री-इंश्योरर Swiss Re के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इसका मकसद उन भारतीय कंपनियों को मदद देना है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपना विस्तार कर रही हैं। यह साझेदारी साइबर खतरों और क्लाइमेट रिस्क जैसे जटिल मामलों के लिए एक सेंट्रलाइज्ड समाधान प्रदान करेगी।
निवेशकों के नजरिए से, यह कदम कंपनी के लिए हाई-वैल्यू बिजनेस की ओर संकेत देता है। यदि घरेलू रिटेल नियमों के कारण मार्जिन पर दबाव आता है, तो यह नई स्पेशलाइज्ड सर्विस कंपनी के मुनाफे को संभालने में मदद कर सकती है।
