Bajaj Finance ने **1 नवंबर** से रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधाओं को नए टर्म लोन उत्पादों से बदलने का फैसला किया है, जिससे कंपनी के **15%** एसेट्स प्रभावित होंगे। साथ ही, कंपनी रूरल और माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में क्रेडिट मानकों को सख्त कर रही है।
RBI के नियमों के साथ तालमेल
Bajaj Finance आने वाले RBI के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को अपडेट कर रही है। 1 नवंबर से कंपनी अपनी मौजूदा फ्लेक्सी-लोन और ओवरड्राफ्ट मॉडल को हटाकर नए टर्म-लोन प्रोडक्ट्स पेश करेगी। रेगुलेटर का मानना है कि NBFCs के लिए रिवॉल्विंग क्रेडिट उत्पादों को सीमित करने से सिस्टम की स्थिरता बढ़ेगी।
मुनाफे पर क्या होगा असर?
कंपनी के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का लगभग 15% हिस्सा इन्हीं रिवॉल्विंग लोन प्रोडक्ट्स से जुड़ा है। फिक्स्ड-टर्म लोन में शिफ्ट होने से ब्याज मार्जिन (Interest Margins) में कमी आ सकती है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी पर अस्थायी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, मैनेजमेंट इसे लंबी अवधि में पोर्टफोलियो को मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम मान रहा है।
रिस्क मैनेजमेंट पर जोर
बदलते आर्थिक माहौल को देखते हुए कंपनी अपनी बैलेंस शीट को 'डी-रिस्क' कर रही है। सूखा प्रभावित राज्यों में कंपनी ने रूरल और माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में लेंडिंग को धीमा कर दिया है। इसके अलावा, उन शहरी इलाकों में भी क्रेडिट स्टैंडर्ड्स सख्त किए जा रहे हैं जहां लोन चुकाने को लेकर जोखिम अधिक है। कंपनी ने उन कर्जदारों को भी सीमित किया है जिन्होंने पहले से ही कई पर्सनल लोन ले रखे हैं। फिलहाल, हाई-लीवरेज सेगमेंट में नए लोन की हिस्सेदारी घटाकर 7% कर दी गई है।
भविष्य के लक्ष्य
इन बदलावों के बावजूद, कंपनी ने अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल टारगेट्स को बरकरार रखा है। Bajaj Finance 22% से 25% की प्रॉफिट ग्रोथ और 19% से 21% के रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) का लक्ष्य लेकर चल रही है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट के ट्रेंड्स पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
