Bajaj Finance के दमदार नतीजे: Q4 में नेट प्रॉफिट **22%** उछला, पर बोर्ड से एक बड़े डायरेक्टर का होगा एग्जिट!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bajaj Finance के दमदार नतीजे: Q4 में नेट प्रॉफिट **22%** उछला, पर बोर्ड से एक बड़े डायरेक्टर का होगा एग्जिट!
Overview

Bajaj Finance ने Q4 FY26 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में **22%** की शानदार बढ़त के साथ **₹5,464 करोड़** का आंकड़ा पार किया है। कंपनी का रेवेन्यू भी **18%** बढ़कर **₹21,605 करोड़** हो गया।

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Bajaj Finance के नतीजों पर एक नजर

कंपनी ने नतीजे जारी करते हुए बताया कि 20% की ग्रोथ के साथ नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) ₹11,781 करोड़ रही। वहीं, कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 22% बढ़कर ₹5,09,975 करोड़ दर्ज किया गया। एसेट क्वालिटी की बात करें तो, नेट एनपीए (Net NPAs) 0.41% के निचले स्तर पर बना हुआ है। इन शानदार प्रदर्शन के बीच, कंपनी के बोर्ड ने ₹6 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है।

बोर्ड में अहम बदलाव और वैल्यूएशन पर सवाल

इन सबके बीच, कंपनी के लिए एक बड़ी खबर यह है कि नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव बजाज 30 जुलाई, 2026 को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में अपने पद के लिए पुनः चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनका यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब Bajaj Finance को उसके प्रीमियम वैल्यूएशन (Premium Valuation) के लिए जाना जाता है। कंपनी का पीई रेशियो (P/E ratio) लगभग 31.5 से 32.3 के दायरे में है, जो कि इंडस्ट्री के औसत 21.52 से काफी ऊपर है। यह प्रमुख बैंकों जैसे HDFC Bank (P/E 16-19) और ICICI Bank (P/E 17-18) से भी ज्यादा है।

NBFC सेक्टर के सामने चुनौतियां

वर्तमान में, पूरा NBFC सेक्टर (NBFC Sector) रेगुलेटरी बदलावों और फंडिंग कॉस्ट (Funding Cost) बढ़ने के दबाव का सामना कर रहा है। RBI द्वारा लाए जा रहे नए नियम और सख्त गवर्नेंस की मांग इस क्षेत्र के परिचालन पर असर डाल सकती है। हालांकि, मजबूत कंज्यूमर डिमांड ने Q4 में प्रदर्शन को सहारा दिया।

प्रीमियम वैल्यूएशन पर निवेशकों की नजर

राजीव बजाज जैसे प्रमुख निदेशक के बोर्ड से बाहर जाने से कंपनी की भविष्य की रणनीति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जिस पर निवेशक अब बारीकी से नजर रखेंगे। ₹5.8 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाली इस कंपनी के 31 से अधिक के पीई (P/E) पर यह लीडरशिप ट्रांजिशन और सेक्टर के दबावों का कितना असर पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी। मौजूदा विश्लेषकों (Analysts) का नजरिया अभी भी सकारात्मक है, जो 13-18% तक के संभावित अपसाइड की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, प्रीमियम वैल्यूएशन और बोर्ड में इस महत्वपूर्ण बदलाव को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.