नतीजों में दिखा दम, रेवेन्यू में 36% की उछाल
BSE के Q4FY26 के वित्तीय नतीजों के अनुसार, पिछले क्वार्टर की तुलना में ट्रांजैक्शन रेवेन्यू में 36% की जबरदस्त वृद्धि हुई है। इस तेजी का मुख्य कारण ऑप्शंस ट्रेडिंग से होने वाली आय में भारी इजाफा रहा।
ब्रोकरेज का भरोसा, टारगेट प्राइस में बढ़ोत्तरी
इन मजबूत नतीजों के दम पर ब्रोकरेज हाउसेस ने BSE पर अपना भरोसा और बढ़ाया है। HDFC Securities ने अपने 'Add' रेटिंग को बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस को ₹3,800 से बढ़ाकर ₹4,300 कर दिया है। वहीं, Motilal Oswal Financial Services ने भी FY27-28 के लिए अर्निंग एस्टिमेट्स में 17-20% तक का इजाफा किया है और टारगेट प्राइस ₹4,400 रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि BSE मार्केट शेयर में अच्छी खासी बढ़त हासिल कर सकती है।
क्यों गिरी BSE की चाल?
हालांकि, इन सकारात्मक संकेतों और बढ़े हुए टारगेट प्राइस के बावजूद, BSE का शेयर शुक्रवार को 1.5% की गिरावट के साथ ₹3,905 पर बंद हुआ। जानकारों का कहना है कि एक्सचेंज को सिर्फ एक्सपायरी वाले दिनों में ही नहीं, बल्कि सामान्य ट्रेडिंग दिनों में भी अपना मार्केट शेयर बढ़ाना होगा। साथ ही, कंपनी के नतीजों में NSE से जुड़े एक पुराने बकाया के लिए प्रोविजन (Provision) का भी असर दिखा, जिसने अन्य खर्चों को बढ़ाया।
SEBI का नया नियम
इसी बीच, कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने शुक्रवार को एक अहम घोषणा की। 1 जुलाई से, शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्राइस डेटा शेयरिंग में 30-दिन का लैग (Lag) लागू किया जाएगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (NISM) को अपने सिम्युलेशन लैब के लिए एक-दिन के लैग के साथ डेटा तक पहुंच मिलेगी।
